यह किसी साइंस फिक्शन मूवी का सीन नही बल्कि हकीकत है। एक 68 साल के बूढ़े व्यक्ति का चेहरा आरा मशीन से दो भागों में कट गया जिसके बाद उस व्यक्ति ने हिम्मत न हारते हुए खुद ही चेहरे को बांध कर अस्पताल गया। सर्जरी के बाद अस्पताल द्वारा जारी किए गए फोटों में दिख रहा है कि कैसे 68 साल का बिल सिंगलटन मरते-मरते बचा।
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घटना आरा मशीन से नियंत्रण खो देने के कारण हुई। घटना मेलबर्ने पश्चिम में बल्लाराट की है। पहली फोटो में दिख रहा है कि सिंगलटन का चेहरा किस तरह से और कहां-कहां से कटा था। उसके चेहरे पर टांके लगे हुए हैं। गर्दन से लेकर मुंह के जबड़े तक कटा हुआ है।
एक्स-रे में दिख रहा है कि मशीन से कटने पर पूरा जबड़ा दो भागों में बंट गया है
सिंगलटन का एक्स-रे
- फोटो : royal Melbourne hospital
हेराल्ड सन के मुताबिक 68 साल के इस व्यक्ति के सिर के एक्स-रे में दिख रहा है कि मशीन से कटने पर बहुत बड़ा छेद हो गया है, दांत को काटते हुए मशीन सिर के ऊपर निकल गई जिससे पूरा चेहरा लगभग दो भागों में हो गया।
मशीन से ध्यान हटने पर हुई यह जानलेवा घटना
इसी मशीन से कटे हैं सिंगलटन
- फोटो : seven news
सिंगलटन 6 मई को अपनी प्रॉपर्टी पर लकड़ी काट रहा था जब एक बड़े पेड़ की लकड़ी काटने को आरा मशीन लगाई लेकिन उनका ध्यान मशीन पर नहीं गया जिसके बाद मशीन उनके चेहरे को काटते हुए बाहर निकल गई।
सब कुछ याद है सिंगलटन को
बिल सिंगलटन
- फोटो : seven news
चैनल 7 को सिंगलटन ने बताया- मैंने महसूस किया और सुना भी कि कैसे ब्लेड मेरे नीचे के जबड़े को काटते हुए निकल गया। वो कटने के बाद खुद अपनी कार तक चलकर गया और खुद ही चलाकर अस्पताल तक ले गया सिंगलटन ने बताया कि वो एंबुलेंस को फोन नहीं कर सकते थे क्योंकि उसकी जीभ दो भागों में कट चुकी थी।
हालत गंभीर देखते हुए उन्हें बड़े अस्पताल में एयरलिफ्ट किया गया
एंबूलेंस
- फोटो : wikimedia commons
एक अखबार को सिंगलटन ने बताया कि मैं आधे रास्ते से भी पीछे था कि मेरी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा, मुझे चक्कर आने लगा। सिंगलटन को गंभीर हालत में देख उन्हें उनके नजदीकी अस्पताल से रॉयल मेलबर्न अस्पताल एयरलिफ्ट किया गया।
68 साल के सिंगलटन ने बताया कि मैंने अपनी हिम्मत नहीं हारी मैं लगभग मर चुका था लेकिन फिर खुद को हिम्मत दी और अस्पताल पहुंचने के बाद खुद ही गाढ़ी पार्क की। सर्जन प्रोफेसर नास्त्री ने 3एडब्ल्यू मोर्निंग को बताया कि - वो देखने से ऐसा लग रहा था कि उसे किसी ने गोली मारी हो।
जब एक आरा मशीन किसी चाज को पकड़ लेती है तो वो अंदर घुसती चली जाती है। इसका इलाज करना बंदूक की गोली लगे का इलाज करने से भिन्न है। सिंगलटन की हिम्मत की दात देनी होगी, वो रिकवर कर रहे हैं और घर आ गए हैं लेकिन उनका कहना है कि वो भविष्य में आरा मशीन का इस्तेमाल करना जारी रखेंगे।