पेरिस क्लाइमेट चेंज एकोर्ड से अमेरिका के अलग होने के फैसले से दुनियाभर में खलबची मची हुई है। इस पर खुद संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की मून ने चिंता जाहिर की है। एक इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सलाह दी कि वे इस समझौते से अगल होने के अपने फैसले पर एक बार फिर से गौर करें।
मून ने यह भी कहा कि ट्रंप को इतिहास के सही पक्ष में खड़ा होकर सोचना चाहिए। मून का मानना है कि अगर अमेरिका इससे अलग होता है तो इसका बड़ा राजनीतिक प्रभाव पड़ेगा और यूएस की जगह कोई और इसकी भरपाई करेगा वो ये ऐसा देखना पसंद नहीं करेंगे।
उनके मुताबिक ट्रंप ने जो रास्ता चुना है वो एक शॉर्ट टर्म विजन है। यूएस के इसमें भागिदारी पर मून ने कहा कि वहां के गवर्नर्स, मेयर्स, बिजनेस लीडर्स और सिविल सोसायटी इसके प्रति उत्साहवर्धक रहते हैं।
बता दें कि बेन ने लगभग एक दशक तक जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबंध की वार्ता में भाग लिया, जिसके परिणामस्वरूप विश्व के तापमान को 2100 तक एक और डिग्री सेल्सियस से बढ़ने की
प्रतिज्ञा हुई।
दरअसल, अगर यूएस इस समझौते से अलग होता है तो इसका नुकसान जरूर होगा, क्योंकि इसमें इन्वेस्ट करने में यूएस बड़ा भूमिका निभाता है। ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि इसका फायदा दूसरे देश उठाते हैं, जबकि यूएस इसमें करोड़ों रुपये बर्बाद करता है।