गोरखपुर के एक अस्पताल में 30 से ज़्यादा बच्चों की मौत की ख़बर विदेशी मीडिया में भी छाई हुई है। दुनियाभर के अहम मीडिया संस्थानों ने ख़बर को प्राथमिकता दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर हालत का भी ज़िक्र किया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, ''इंसेफेलाइटिस हर साल भारत के लिए सामान्य सी बात हो गई है। मॉनसून के वक़्त इससे सैकड़ों जानें जाती हैं। इस बीमारी की मुख्य वजह दूषित खाना और पानी के साथ मच्छर का काटना है।
इसके साथ ही यह संक्रमण की तरह फैलता है।'' न्यूयॉर्क टाइम्स ने आगे लिखा है, ''भारत लोगों की सेहत पर मुश्किल से अपनी जीडीपी का एक फ़ीसदी हिस्सा खर्च करता है। इस मामले में भारत का शुमार स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च करने वाले देश के रूप में है. भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की भारी कमी है।''
इस ख़बर को वॉशिंगटन पोस्ट ने भी प्रमुखता से जगह दी है। वॉशिंगटन पोस्ट ने शांति के नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी के बयान के हवाले से इसे सामूहिक हत्या करार दिया है। वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी हेडिंग में ही सामूहिक हत्या की बात लिखी है। कैलाश सत्यार्थी ने कहा है, ''30 बच्चों की मौत ऑक्सीजन नहीं होने की वजह से हुई है. यह कोई त्रासदी नहीं बल्कि सामूहिक हत्या है। आज़ादी के 70 साल होने का मतलब हमारे बच्चों के लिए क्या है?"
मध्य पूर्व के अलजज़ीरा ने भी गोरखपुर में बच्चों की मौत और भारत में सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी प्रतिक्रिया को जगह दी है। अलजज़ीरा ने समाचार एजेंसी एपी को दिए एक पीड़ित के बयान को छापा है। इसमें गौतम नाम के एक पीड़ित ने कहा है, ''हमलोगों ने अपने बच्चों को देखा कि वो सांस नहीं ले पा रहे थे। ऐसा देखते हुए भी हम कुछ कर नहीं पाए।'