अफ्रीकी देश आइवरी कोस्ट में एक जगह पर आम के पेड़ के नीचे शादीशुदा पुरुषों का स्कूल लगा है। यहां पढने वाले वयस्क पुरुष अपने-अपने परिवारों के मुखिया हैं।
तो इसमें खास क्या है? खास यह है कि ये पुरुष यहां पढने-लिखने के लिए नहीं बल्कि 'परिवार नियोजन' का पाठ पढने आए हैं। ऐसे स्कूल देश भर में कई जगह खुले हैं।
इस स्कूल को अदीजा बा चलाती हैं जो 'बिहेवियर चेंज' नामक संस्था की राष्ट्रीय कार्यक्रम अधिकारी हैं। आइवरी कोस्ट के हर गांव में जाकर वे इस तरह के स्कूल लगाती हैं और पुरुषों को अपने परिवार के जिम्मेदारियों के प्रति जागरुक करती हैं।
लेकिन साकासोउ के रहने वाले कोयायू कोयायू किसी सेलेब्रिटी की तरह हैं। वे 26 बच्चों के पिता और चार पत्नियों के पति होकर भी जवान दिखते हैं।
कोयायू कहते हैं, "हमारी संस्कृति में ज्यादा बच्चों वाले व्यक्ति को अमीर माना जाता है और उसे समाज में ऊंचा दर्जा दिया जाता है।"
इसके बावजूद वे अदीजा के स्कूल के सदस्य हैं और अब वे दूसरे पुरुषों को ऐसा नहीं करने का सलाह देते हैं।
कोयायू कहते हैं, "अगर आप बच्चों के जन्म में अंतर रखते हैं तो वे स्वस्थ होते हैं और ये महिलाओं के लिए भी अच्छा होता है।"
परिवार नियोजन का प्रचार कठिन काम
आइवरी कोस्ट में परिवार नियोजन का प्रचार करना आसान नहीं था। अदीजा कहती हैं कि शुरू में परिवार नियोजन की बात करना बहुत कठिन था।
वे कहती हैं, "कुछ पुरुष सोचते हैं कि गर्भ निरोधक उनकी पत्नी को बाँझ बना देगा।"
अदीजा कहती हैं, "मैं उन्हें समझाती हूं कि औरत आम के पेड की तरह है। उसमें फल लगता है, फिर कुछ अंतराल बाद फल लगते हैं।
पत्नी के लिए भी जरूरी है कि वे अपने नवजात बच्चे की पूरी तरह से देखभाल करे और अपने पति के लिए खूबसूरत बनी रहे।"
मर्दों का शक
अदीजा बा कहती हैं, "कुछ मर्द गर्भ नियंत्रण को शक की नजर से देखते हैं। वे सोचते हैं कि इसका इस्तेमाल उनकी पत्नियां दूसरे मर्दों के साथ सोने में करेंगी और चूंकि वे गर्भधारण नहीं कर पाएंगी, इसलिए कोई जान भी नहीं पाएगा। हम उन्हें समझाते है कि गर्भ निरोधक इसलिए नहीं हैं।"
अदीजा बा ने दो साल पहले पतियों के लिए इस स्कूल की शुरुआत चार स्कूलों से की थी जिनमें साकासोउ का ये स्कूल भी शामिल है।
वे बताती हैं कि अगले साल के अंत तक पूरे आइवरी कोस्ट में इनकी संख्या 52 तक पहुंच जाएगी।