जिम्बाब्वे में एक राजनीतिक नाटक के अंतिम अध्याय का मंचन आज नये राष्ट्रपति एमर्सन नांगाग्वा के शपथ के साथ पूरा हुआ। इसकी शुरूआत सेना ने तत्कालीन राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का तख्तापलट करने के साथ की। शपथ समारोह में मुगाबे के मौजूद रहने की संभावना जताई गई, लेकिन वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
अब तक रॉबर्ट मुगाबे के करीबी सहयोगी रहे नये राष्ट्रपति नांगाग्वा ने हरारे से बाहरी क्षेत्र में राष्ट्रीय खेल स्टेडियम स्थित कार्यालय में हजारों समर्थकों, गणमान्य लोगों और विदेशी राजनयिकों की मौजूदगी में शपथ ग्रहण की।
इस दौरान समर्थकों की मौजूदगी और उत्साह के चलते कड़ी सुरक्षा के तहत पूरे स्टेडियम को बंदूकधारियों ने घेर रखा। इस दौरान 23 साल के शेरोन मोउकुफ ने मुगाबे का जिक्र करते हुए कहा कि हम बेहद लंबे समय से एक तानाशाही के अधीन रहे हैं और नांगाग्वा से बहुत कुछ आशा कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पूर्व राष्ट्रपति मुगाबे ने दक्षिण अफ्रीका के इस देश पर करीब 37 साल तक शासन किया था और उन्होंने जब उपाध्यक्ष नांगाग्वा को बर्खास्त किया तब सेना ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें पद से हटा दिया था।
इस बीच हाथों में बैनर लिए कुछ लोग कह रहे थे कि हम सेना का शुक्रगुजार हैं। दरअसल, जिम्बाब्वे में पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की तबीयत दिनोंदिन खराब हो रही थी और वे अपने उत्तराधिकारी के रूप में पत्नी ग्रेस को आगे बढ़ा रहे थे। लेकिन सेना प्रमुख ने कार्रवाई की और नांगाग्वा को राष्ट्रपति बनाया।