मिस्र में राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी की इस घोषणा के बाद कि वो अपनी शक्तियों को कम कर रहे हैं, विपक्ष ने मंगलवार को फिर से प्रदर्शनों की बात कही है।
विपक्षी दलों के गुट नेशनल सैल्वेशन फ्रंट ने दोबारा कहा है कि वो संविधान के प्रारूप को नहीं मानती जिस पर जनमत संग्रह होना है।
रविवार को विपक्षी नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद नेशनल सैल्वेशन फ्रंट ने कहा कि संविधान का प्रारूप मिस्र के लोगों की आकांक्षाओं को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करता।
गुट के प्रवक्ता सामेह ऐशाउर ने एक पत्रकारवार्ता में कहा, "हम जनमत संग्रह को खारिज करते हैं क्योंकि इससे लोगों में फूट बढ़ेगी।"
विपक्ष की मांग है कि मोर्सी नए संविधान के लिए होने वाले जनमत संग्रह को स्थगित करें, लेकिन कुछ नेताओं ने मोर्सी के ताजा कदम को भी खारिज कर दिया है।
आलोचकों का आरोप है कि राष्ट्रपति मोर्सी तानाशाह की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति मोर्सी के मुताबिक वो जनक्रांति की रक्षा कर रहे हैं।
फ्री इजीप्शियन पार्टी के उप-महासचिव महमूल अल अलयाली ने बीबीसी से कहा कि राष्ट्रपति मोर्सी को 15 दिसंबर के अपने जनमत संग्रह को रद्द कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति ऐसा नहीं करते हैं तो विपक्ष पूरे देश में हड़ताल का आयोजन करेगी।
उन्होंने कहा, “हम सभी शहरों की सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करेंगे।”
उधर मुसलिम ब्रदरहुड के नेता मोहम्मद सूदान ने कहा कि राष्ट्रपति मोर्सी जनमत संग्रह के आयोजन के लिए संवैधानिक रूप से वचनबद्द हैं।
गौरतलब है कि मोर्सी के इस्लामी सहयोगियों के प्रभुत्व वाली संवैधानिक समिति पहले ही संविधान के प्रारूप का अनुमोदन कर चुकी है।
सैनिकों ने राष्ट्रपति भवन को चारों ओर से घेरा हुआ है।
तनाव
मोर्सी के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई हिंसा में कुछ लोग मारे भी गए हैं
काहिरा में बीबीसी संवाददाता जॉन लायन के मुताबिक स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है।
22 नवंबर के एक आदेश के मुताबिक मोहम्मद मोर्सी ने खुद को अतिरिक्त शक्तियाँ दे दी थीं जिन्हें अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी।
हालाँकि उस आदेश को वापस ले लिया गया है, उस आदेश के अंतर्गत लिए गए कुछ फैसले अभी भी लागू हैं।
मिस्र की शक्तिशाली सेना ने चेतावनी दी है कि वो मिस्र में स्थिति को काबू से बाहर जाने नहीं देगी। उसने सभी पक्षों से बातचीत की मेज पर आने को कहा है।
मोर्सी के समर्थकों का कहना है कि न्यायपालिका में पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के वक्त के न्यायाधीश भरे हुए हैं।
मोर्सी के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई हिंसा में कुछ लोग मारे भी गए हैं।