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इबोला के खतरे को कम आंका गया: WHO

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घातक इबोला वायरस से होने वाली मौतों की संख्या 1,069 हो गई है। इसके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का कहना है कि लगता है कि इबोला के प्रसार की गंभीरता को 'कम करके आंका गया'।
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डब्लूएचओ ने कहा कि इसके कर्मचारियों के पास इस बात के साक्ष्य हैं कि सामने आए संक्रमण और इससे होने वाली मौतों के मामले असली हालात बयां नहीं करते।

डब्लूएचओ के बयान में कहा गया कि इस बीमारी से निपटने के लिए 'अभूतपूर्व कदम' उठाने की जरूरत थी।

इस वायरस का संक्रमण फरवरी महीने में अफ्रीकी देश गिनी में शुरू हुआ और वहां से सिएरा लियोन, लाइबेरिया और नाइजीरिया जैसे पड़ोसी देशों तक फैल गया।

'तेज़ी से फैलने का डर'

हालांकि डब्लूएचओ का कहना है कि इबोला के संक्रमण का ख़तरा हवाई सफ़र के दौरान कम है, क्योंकि यह बीमारी हवा से नहीं फैलती।

इस कारण से केन्या एअरवेज ने इबोला से प्रभावित पश्चिम अफ्रीकी देशों में अपनी उड़ाने रद्द करने से इनकार कर दिया है। डब्लूएचओ का कहना है कि इस वायरस का संक्रमण कुछ समय तक 'जारी रहने की आशंका' है।

इसकी तरफ से जारी बयान में कहा गया, "अत्यधिक गरीबी, स्वास्थ्य व्यवस्था की असफलता, डॉक्टरों की भारी कमी के कारण बीमारी के तेजी से फैलने का खतरा है।"
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इबोला वायरस का प्रकोप

बीबीसी के इशाक खालिद ने बताया कि लोगों के बीच इस तरह का संदेश फैला कि एक ख़ास घोल में नहाने और इसे पीने से इबोला वायरस से बचा जा सकता है।

इस वायरस की अभी कोई वैक्सीन या दवा नहीं है।

लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के चेतावनी देने के बावजूद बहुत से लोगों को घोल पीने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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