पिछले साल अप्रैल में आए भीषण भूकंप के दंश से अभी नेपाल उभरा ही नहीं है कि दूसरे भूकंप का खतरा मंडराने लगा है। हालिया शोध में पाया गया है कि काठमांडू के 11 किमी नीचे जमीन के अंदर दरार की वजह से लगातार दबाव बन रहा है।
इसके चलते नेपाल और भारत की जमीन के नीचे के हिस्से लगातार टकरा रहे हैं। शोध में चेताया गया है कि अनुमानित समय से पहले नेपाल में दूसरा भयानक भूकंप आ सकता है।
इस शोध में अप्रैल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसमें आठ हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी।