इस्लामिक स्टेट के कब्जे में जो इलाका है, वहाँ चलाए जा रहे शासन की भयावह असलियत का अंदाजा लगाना बाहर के लोगों के लिए बेहद मुश्किल है। लेकिन सीरिया के अंदर कुछ एक्टिविस्ट हैं जो अपने जीवन को खतरे में डालकर दुनिया को वहां का हाल बता रहे हैं। बीबीसी पिछले तीन महीनों से इस्लामिक स्टेट की राजधानी रक्का के एक युवक के संपर्क में है। उनके दिल दहला देने वाले अनुभवों की पहली किस्त आप पढ़ चुके हैं।
आज पढिए 40 कोड़ों की सजा मिलने के बाद इस युवा के साथ आगे क्या हुआ - जरा सी भी दया दिखाए बिना वह मुझे कोड़े मारता रहा। उसकी आंखों में मुझे दिख रहा था कि उसे मुझे कोड़े मारते हुए बहुत गर्व महसूस हो रहा था।
मैं हेस्बा, आईएस की धार्मिक पुलिस के मख्यालय से निकला और अपने घर के दरवाजे तक पहुंचते पहुंचते गिर गया। मेरी हालत देखकर और ये सुनने के बाद कि मेरे साथ क्या हुआ, मेरी गर्भवती बहन को शॉक लगा और उसका रक्तस्राव होने लगा।
बहन के लिए खोजना पड़ा डॉक्टर
डॉक्टर को किया गिरफ्तार
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हम समझ गए कि जितनी जल्दी हो सके उसे गाइनेकॉलोजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) के पास ले जाना होगा। लेकिन जब हम क्लिनिक पर पहुंचे तो देखा कि वह बंद थी। बाहर खड़े एक आदमी ने मुझे बताया, "यह डॉक्टर सालों से मेरा पडोसी था लेकिन आइएस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और क्लिनिक बंद कर दिया।
उन्होंने पुरुष डॉक्टरों के महिला मरीजों के इलाज करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।" हमें एक महिला गाइनेकॉलोजिस्ट को ढूंढने निकलना पडा। हमने बहन को घर जाकर आराम करने को कह दिया।
उसी दिन, बाद में, मैं अपने एक पुराने दोस्त से टकरा गया। वह घबराया हुआ दिख रहा था।
उसने मुझे एक कोने में खींचा और फुसफुसाकर कहा, "हमने आइएस के खिलाफ काम करने वाला एक गुप्त प्रचार दल बनाया है। हम पूरी दुनिया को बताना चाहते हैं कि यह हत्यारे हमारे शहर में क्या कर रहे हैं। इसमें तुम भी अपनी भूमिका निभा सकते हो।"
'हम लोग जकात से हैं'
और हम वो पैसा लेने आए हैं!
- फोटो : BBC
घर लौटते हुए मैं अपने दोस्त मोहम्मद से मिला, जो एक दुकान चलाता है। उसने सडक के पार एक दुकान की ओर इशारा किया जिसके मालिक को वह सालों से जानता था। आइएस के कुछ आदमी उससे बात कर रहे थे। उनमें से एक के हाथ में बहुत से कागज थे। उनमें से एक चीखा, "अरे! इस दुकान का मालिक कौन है?" मोहम्मद ने जवाब दिया, "ये मेरी है, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं?"
उसने कहा, "हम लोग जकात से हैं।" यह गरीबों को दिया जाने वाला दान होता है लेकिन आइएस इसे टैक्स की तरह वसूलता है। वह आगे कह रहा था, "और हम वह पैसा लेने आए हैं जो तुमने हमें देना है।" मोहम्मद ने जोर देकर कहा कि वह पहले ही सब दे चुका है और उस पर कुछ भी बाकी नहीं है। "चुप रहो।!" आइएस का आदमी गरजा।
"तुम्हें एक लाख सीरियाई पाउंड देने ही होंगे।" मोहम्मद सदमे में आ गया, "लेकिन यह तो बहुत ज्यादा पैसा है।"लेकिन उसे जैसे तैसे करके पूरा पैसा देना पड़ा। जिन लोगों ने आइएस का विरोध किया उनके कटे हुए सिर पार्कों की बाड और लैंप पोस्ट पर लटके हुए नजर आए, एक बर्बर चेतावनी की तरह।
यह महिला बदचलन है!
पत्थर मार-मार इसको जान से मार दिया जाए!
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उस रात हमारा घर धमाकों की आवाजों से दहल उठा। मैंने ऊपर बमवर्षक विमानों को उडते देखा। मैंने टीवी चलाया और समाचार में देखा कि अंतरराष्ट्रीय गठबंधन सेनाएँ आइएस के खिलाफ पहला हवाई हमला कर रही थीं। अगले दिन एक स्थानीय टैक्सी ड्राइवर ने मुझे बताया कि आइएस की बहुत सी इमारतों को निशाना बनाया गया है।
उसने मुझे चेतावनी दी कि पुलिस बड़ी संख्या में गलियों में घूम रही है और उन जासूसों की तलाश कर रही है जिन्होंने हवाई जहाजों को जानकारी दी है।
इतने में मैंने देखा कि एक गहरे गड्ढे के पास भीड़ जमा है। अंदर एक महिला दुबकी हुई बैठी है। मैंने लोगों से पूछा कि वह कौन है और वहां क्या कर रही है। इससे पहले कि मुझे कोई जवाब मिलता नकाब पहले एक लंबे आदमी ने पढना शुरू किया, "यह महिला बदचलन है और इसकी सजा है कि पत्थर मार-मार इसको जान से मार दिया जाए!"
छुपो!" बाजार पर हमला हुआ
हर ओर लोगों के शरीर के टुकडे पड़े थे
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उसके शब्द ऊपर आ रहे जहाजों के शोर में दब गए। एक सामान बेचने वाला चिल्लाया "छुपो, छुपो!" बाजार पर हमला हुआ था। बड़े धमाके हो रहे थे और हर ओर लोगों के शरीर के टुकडे पड़े थे। ज्यादातर आम नागरिक थे। यह एक रूसी हवाई हमला था जिसने चरमपंथियों को निशाना बनाना था।
क्या हम जमीन पर जिस चरमपंथ का सामना कर रहे हैं वह पर्याप्त नहीं है, जो तुम इसे आसमान से भी बरसा रहे हो? (इस्लामिक स्टेट की कथित राजधानी रक्का के एक युवा की डायरी का तीसरा पन्ना गुरुवार को पढ़िए।)