चीन की सांस्कृतिक क्रांति के समय से हत्या का आरोप झेल रहे एक बुजुर्ग के खिलाफ मुकदमा शुरु हुआ है। इस घटना के बाद से वहां इंटरनेट पर लोगों के बीच तीखी बहस शुरु हो गई है।
छिउ नाम के इस व्यक्ति की उम्र 80 साल से भी अधिक बताई जाती है। आरोप ये है कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति की हत्या की थी जिन्हें वे जासूस समझते थे।
चीन में सांस्कृतिक क्रांति 1966 में माओ ने शुरु की थी। इस दौरान बहुत से बुद्धिजीवियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि उस घटनाक्रम से जुड़े ज्यादातर लोगों के खिलाफ कदम नहीं उठाए गए तो अब इतने सालों बाद एक बुज़ुर्ग व्यक्ति को क्यों निशाना बनाया जा रहा है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक 1967 में अभियुक्त ने एक डॉक्टर की रस्सी से गला दबाकर हत्या कर दी थी।
बलि का बकरा?
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक छिउ के खिलाफ 1967 में आरोप तय किए गए थे और पिछले साल उन्हें गिरफ्तार किया गया। दस साल तक चली माओ की सांस्कृतिक क्रांति का मकसद बड़े पैमाने पर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उथल पुथल मचाना था ताकि पुरानी संस्थाओं को जड़ से उखाड़ा जा सके।
आम लोगों को प्रोत्साहित किया जाता था कि वो समृद्ध या बर्जुआ वर्ग के लोगों को चुनौती दें। नतीजा ये हुआ कि ऐसे हजारों लोगों को प्रताड़ित किया गया जिन्हें बुद्धिजीवी या देश का दुश्मना समझा जाता था।
शंघाई में बीबीसी के जॉन सडवर्थ का कहना है कि सांस्कृतिक क्रांति के दौरान क्या हुआ था वो आज भी चीन में संवेदनशील मुद्दा है और सार्वजनिक स्तर पर इस बारे में बात नहीं होती।
चीन की सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक व्यक्ति बोलते हैं कि इस तरह मुकदमा चलाकर आप सरकार और पार्टी के कदमों के लिए एक व्यक्ति को बलि का बकरा नहीं बना सकते।
'गलती की लिए सजा'
द साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने एक व्यक्ति का हवाला देते हुए लिखा है कि उन बड़े नामों के बारे में क्या जिन्होंने ये क्रांति शुरु की थी। उन्होंने तो कभी जिम्मेदारी नहीं ली।
हालांकि ऐसे लोग भी हैं जो इसे सही दिशा में उठाया कदम मानते हैं। एक व्यक्ति ने इंटरनेट पर लिखा है कि इससे ये संदेश जाता है कि जिन्होंने गलत काम किया उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
वहीं सरकारी नियंत्रण वाले चाइना यूथ डेली ने संपादकीय में उस दौरान हुई ज्यादतियों की तुलना नाजी काल से की है। इसमें लिखा गया है कि सांस्कृतिक क्रांति मानव अस्मिता पर हमला था जहां अपमान, गलत बर्ताव आम बात थी।