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जापान में ब्लड ग्रुप का बुखार

Tue, 06 Nov 2012 09:03 AM IST
रुथ इवान्स
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भारत में आपका ब्लड ग्रुप क्या है, इसकी बहुत ज़्यादा अहमियत नहीं होती लेकिन जापान में ऐसा नहीं है। वहां चाहे कोई नौकरी के लिए इंटरव्यू दे या फिर शादी के लिए वर-वधू की तलाश कर रहा हो, हर किसी को इस सवाल का सामना करना होता है कि आपका ब्लड ग्रुप क्या है?
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यह अचरज का विषय भले हो लेकिन जापान में कामकाज, प्यार, शादी और जीवन सब जगह ब्लड ग्रुप जरूरी होता है। आप कह सकते हैं जापान में ब्लड ग्रुप जाने बिना जीवन नहीं चल सकता। दरअसल जापान में ज़्यादातर लोग मानते हैं कि ब्लड ग्रुप से आपके मिजाज और व्यक्तित्व का पता लगाया जा सकता है।

ब्लड ग्रुप से पता चलता है मिजाज
जापान में प्रचलित मान्यता के मुताबिक 'ए' ब्लड ग्रुप वाले लोग काफी संवेदनशील होते हैं, अपने काम में दक्ष होते हैं और अच्छे टीम प्लेयर भी, लेकिन कुछ ज्यादा ही उत्सुकता भी उनमें होती है। 'ओ' ब्लड ग्रुप वाले लोग जिज्ञासु और उदार होते हैं लेकिन बहुत जिद्दी होते हैं।
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वहीं 'एबी' ब्लड ग्रुप वाले लोग बनावटी होते हैं साथ ही उनका व्यक्तित्व रहस्यात्मक होता है। उनका रवैया कई बार अप्रत्याशित होता है।'बी' ब्लड ग्रुप वाले लोग हंसमुख होते हैं, हालांकि उनका रवैया सनकी, आत्मकेंद्रित और स्वार्थी वाला होता है। जापान में ब्लड ग्रप से संबंधित किताबें भी काफी लोकप्रिय हैं। विभिन्न ब्लड ग्रुप से संबंधित चार किताबों की पचास लाख से ज़्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं।

बाज़ार में भी छाया ब्लड ग्रुप का बुख़ार
जापान के टेलीविजन शो, अख़बार और पत्रिकाओं में ब्लड ग्रुप के आधार पर जन्म कुंडली दिखाए और छापे जाते हैं। ब्लड ग्रुप पर आधारित कामिक्स और वीडियो गेम्स भी काफी लोकप्रिय हैं। इतना ही नहीं जापानी बाज़ार में ब्लड ग्रुप पर आधारित ढेरों उत्पाद मौजूद हैं। जिनमें शीतल पेय, च्यूंइगम, साबुन और यहां तक कि कंडोम भी उपलब्ध हैं।

अमूमन ब्लड ग्रुप का पता रक्त में मौजूद प्रोटीन की मात्रा के आधार पर लगाए जाते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ ब्लड ग्रुप को लेकर प्रचलित मान्यताओं को ख़ारिज करते रहे हैं। बावजूद इसके जापान में हर कोई इसे मानता है। जापानी और कुछ करें या ना करें ब्लड ग्रुप का पता सबसे पहले लगाते हैं। यही वजह है कि देश की कुल आबादी में कौन किस ब्लड ग्रुप का है, इसका ब्यौरा मौजूद है।

देश की कुल आबादी में 40 फ़ीसदी लोग 'ए' ब्लड ग्रुप वाले हैं, जबकि 30 फ़ीसदी लोगों का ब्लड ग्रुप 'ओ' है। 20 फ़ीसदी लोग 'बी' ब्लड ग्रुप वाले हैं जबकि बाक़ी के 10 फ़ीसदी लोग 'एबी' ब्लड ग्रुप वाले लोगों का है। जापानी इसके समर्थन में एक अजीब सा तर्क भी देते हैं। जापानियों के मुताबिक वहां के समरस समाज में कम से कम एक पैमाना तो ऐसा है जिससे लोग अलग अलग समूहों में देखे जाते हैं।

जापानी अनुवादक चाई कोबायाशी कहते हैं, " जापानी समाज में हर कोई बराबर है। लेकिन हम लोग ब्लड ग्रुप के जरिए लोगों को अलग अलग समूह में बांट लेते हैं। हालांकि दूसरी ओर इससे ब्लड ग्रुप 'बी' और 'एबी' के लोग अल्पसंख्यक के दायरे में भी आ जाते हैं।"

एशिया और पश्चिम जगत का अंतर
वैसे 1901 से पहले ऐसा नहीं रहा होगा। क्योंकि इसी साल आस्ट्रियाई वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाइनर ने ब्लड ग्रुप ( एबीओ) की पहचान की थी। इस ख़ोज के लिए उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। ब्लड ग्रुप से जुड़ी एक दिलचस्प बात जानकारी यह भी है कि पश्चिमी जगत में 'ओ' और 'ए' ब्लड ग्रुप के लोग ज़्यादा पाए जाते हैं। कुल आबादी का 85 फ़ीसदी हिस्सा इन्हीं दो ब्लड ग्रुप वाले लोगों का है। जबकि भारत सहित दूसरे एशियाई देशों में 'बी' ब्लड ग्रुप वाले लोग ज़्यादा होते हैं। हालांकि जापान इसका अपवाद है।
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