दुनिया भर के हजारों ईसाई श्रद्धालु बेथलेहम में हर्ष और उल्लास के साथ ईसा मसीह के जन्म का जश्न मना रहे हैं। दिन का समापन 1700 वर्ष पुराने चर्च ऑफ नेटिविटी में क्रिसमस की सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ। यह गिरिजा घर उस स्थान पर बना हुआ है जहां यह माना जाता है कि यीशु का जन्म हुआ था।
बेथलेहम में यरुशलम में रोमन कैथोलिक चर्च के प्रमुख ने स्वतंत्र फ़लस्तीन राज्य के गठन का समर्थन किया। इस बीच वेटिकन में ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप बेनेडिक्ट 16वें ने ऐतिहासिक सेंट पीटर्स बैसिलिका में परंपरागत सामूहिक प्रार्थना की अगुवाई की। इस दौरान पोप ने ईसाइयों से अपनी भागदौड़ भरी ज़िदगी में भगवान के लिए समय निकालने का आग्रह किया।
बेनेडिक्ट ने साथ ही इज़रायलियों और फ़लस्तीनियों के शांति के साथ अपना जीवन व्यतीत करने के लिए प्रार्थना की। पोप ने लेबनान, सीरिया और इराक में शांति के लिए भी प्रार्थना की। सामान्य तौर पर सामूहिक प्रार्थना मध्य रात्रि के समय आयोजित की जाती है लेकिन 85 वर्षीय पोप को थकान से बचाने के लिए इसे दो घंटे पहले ही आयोजित कर दिया गया।
विश्व विरासत स्थल
इससे पहले सोमवार को लैटिन धर्मगुरु फ़ौवाद त्वॉल ने कहा कि क्रिसमस हमारे प्रभु यीशु के जन्म और स्वतंत्र फलस्तीन के जन्म का जश्न होगा। उन्होंने कहा कि रास्ता [स्वतंत्र राज्य के लिए] अभी काफी लंबा है और इसके लिए हमें अथक प्रयास की जरूरत होगी।
जॉर्डन में जन्मे धर्मगुरु ने यरुशलम की ओल्ड सिटी से पश्चिम तट तक एक सामूहिक जुलूस की अगुवाई की जो इसराइलियों की ओर से जगह-जगह लगाए गए अवरोधकों और जाँच चौकियों से गुजरी। वह मैनेजर स्क्वायर चर्च में हजारों पर्यटकों, श्रद्घालुओं और पादरी से भी मिले। ईसाई धर्मगुरु ने बाद में चर्च ऑफ नेटिविटी में सामूहिक प्रार्थना की अगुवाई की है।
उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थान से राजनेताओं और सदिच्छा वाले लोगों का आह्वान करता हूं कि वे फ़लस्तीन और इसराइल के बीच शांति स्थापना और सुलह के लिए तथा मध्य पूर्व के दुखों का अंत करने के लिए संकल्प के साथ काम करें। इसराइल और गज़ा के चरमपंथियों के बीच पिछले महीने हुई झड़पों का उल्लेख करते हुए धर्मगुरु ने कहा कि उन्होंने अपनी प्रार्थना में उन सभी अरब और यहूदी परिवारों को भी याद किया जो इस संघर्ष से प्रभावित हुए है।
गत नवंबर में संयुक्त राष्ट्र ने फ़लस्तीन का दर्जा बढ़ाकर 'गैर सदस्य पर्यवेक्षक देश' कर दिया गया था। हालांकि इसराइल ने अमरीका के समर्थन से इस कदम का विरोध किया था। उसका कहना था कि इसकी आड़ में फलस्तीन रुकी पड़ी शांति प्रक्रिया को दरकिनार करना चाहता है। चर्च ऑफ नेटिविटी पश्चिम तट इलाक़े में स्थित है जिसका प्रशासन फ़लस्तीन प्राधिकरण के हाथों में है।
जून में इस गिरिजा घर को औपचारिक तौर पर यूनेस्को का विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया था। फलस्तीन को इस साल की शुरुआत में यूनेस्को का पू्र्णकालिक सदस्य बनाए जाने के बाद इसकी सिफारिश की थी।