म्यांमार से भागकर बांग्लादेश पहुंचे 4 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए बांग्लादेश ने 14,000 नए शिविरों का निर्माण कर रहा है। इन लोगों को एक जगह तक ही सीमित रखने और देश के दूसरे हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए ऐसा किया गया है।
म्यांमार के रखाइन प्रांत में सेना की कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश पहुंचे हैं। इस सैन्य कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र ने ‘जातीय नरसंहार’ जैसा बताया है। उधर, म्यांमार सरकार का कहना है कि गत माह पुलिस पर आतंकियों के हमले के जवाब में देश के उत्तरी प्रांत में ये कार्रवाई की जा रही है। उसने सैन्य कार्रवाई में आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने से इनकार किया है।
रोहिंग्याओं ने बढ़ाई बांग्लादेश की चिंता
बांग्लादेश इतने बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन से चिंतित है। उसे संयुक्त राष्ट्र और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मदद से बनाए गए शिविरों में शरणार्थियों को आश्रय देने में कठिनाई आ रही है। बांग्लादेश के आपदा प्रबंधन मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, कुतुपलांग में 14,000 अस्थायी शिविरों के निर्माण का काम रविवार से शुरू हो गया है।
सेना से 10 दिन में इनका निर्माण कार्य पूरा करने को कहा गया है। कुतुपलांग दक्षिणपूर्वी शहर कॉक्स बाजार के पास का वह इलाका है, जहां रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए शिविर बनाए जा रहे हैं। आपदा प्रबंधन एवं राहत मंत्रालय के सचिव शाह कमल के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य शरणार्थियों को देश में फैलने से रोकना और समस्या से सही तरीके से निपटना है।