तीन लोगों के डीएनए से वैज्ञानिकों को दुनिया का पहला बच्चा पैदा करने में बड़ी सफलता मिली है। मैक्सिको में थ्री पेरेंट तकनीक से पैदा होने वाले बच्चे को विज्ञान का बड़ा चमत्कार ही माना जा रहा है। यह क्लोनिंग और आईवीएफ तकनीक के प्रयोगों से भी अलग है जिसे विवादित भी माना गया है, क्योंकि इस तकनीक के अंतर्गत पेरेंट में दुर्लभ आनुवांशिक बदलाव करते हुए स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया जाता है।
‘न्यू साइंटिस्ट’ नामक जर्नल में दुनिया के इस पहले बच्चे के पैदा होने घोषणा की गई है। जॉर्डन के पेरेंट्स का यह बच्चा फिलहाल पांच माह का है। मैक्सिको में अमेरिकी टीम द्वारा किए गए इस ट्रीटमेंट की फिलहाल काफी सीमित जानकारी जारी की गई है, लेकिन ‘अमेरिकन सोसायटी ऑफ रिप्रॉडक्टिव मेडिसिन’ के तत्वावधान में अगले माह होने वाली एक साइंटिफिक कांग्रेस में इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक पैदा वाले बच्चे की मां में एक विशेष प्रकार का जीन ‘ली सिंड्रोम’ था जो नर्वस सिस्टम के विकास को प्रभावित करता है। यह जीन ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ के रूप में डीएनए के भीतर एक खास किस्म की बीमारी पैदा करता है जिससे बच्चे में ऊर्जा की कमी रहती है और मांस पेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसी जीन के कारण इस बच्चे की मां के पूर्व में दो बच्चों की मौत हो चुकी थी।
अमेरिकी वैज्ञानिक डॉक्टरों की टीम ने मां तथा एक अन्य डोनर महिला के अंडों को पिता के स्पर्म को एक साथ रखकर निषेचित किया। बाद में डोनर के निषेचित अंडे को बाहर कर उसे मां के निषेचित अंडे से रिप्लेस करने की योजना बनाई गई।
लेकिन मुस्लिम होने के कारण दंपत्ति ने दो भ्रूणों को अलग करने का विरोध किया। अत: डॉक्टरों की टीम ने मां के अंडों में से एक भ्रूण को अलग करके डोनर के अंडे में डाल दिया। बाद में इसे डोनर के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए और मां के न्यूक्लियर डीएनए को लेकर पिता के स्पर्म के साथ निषेचित किया गया।