पूर्व रूसी जासूस और उसकी बेटी को जहर देकर मारने के आरोप में ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों से रूस के राजनयिकों को निष्कासित करने के बाद ऑस्ट्रेलिया, नाटो और आयरलैंड ने भी 10 राजनयिकों को निकालने की घोषणा कर दी है। इस मामले में ब्रिटेन ने रूस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है जिस पर कई देश रूस के खिलाफ खड़े हो गए हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि पश्चिमी देश दो ध्रुवों में बंटते जा रहे हैं, जिससे शीतयुद्ध जैसी स्थिति बन गई है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने मंगलवार को एलान किया कि उन्होंने रूस के दो राजनयिकों को देश से निकलने का आदेश दे दिया है। एक दिन पहले ही अमेरिका ने रूस के 60 राजनयिकों को निष्कासित किया था। पीएम टर्नबुल और विदेश मंत्री जूली बिशप ने एक संयुक्त बयान में कहा कि दो रूसी राजनयिकों की पहचान अघोषित खुफिया अधिकारियों को तौर पर की गई है, उन्हें सात दिनों के भीतर ऑस्ट्रेलिया छोड़ने का आदेश दिया गया है। वहीं नाटो प्रमुख जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने मंगलवार को कहा कि उनके गठबंधन ने सात रूसी राजनयिकों को निकाल दिया है जबकि तीन अन्य को मान्यता देने से इनकार कर दिया। आयरलैंड ने भी एक रूसी राजनयिक को अपने देश से निकाल दिया है।
इस तरह ऑस्ट्रेलिया, नाटो और आयरलैंड दुनिया के उन 20 से अधिक देशों में शुमार हो गए हैं जिन्होंने अपने देश से रूस के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। शीतयुद्ध के बाद इस घटनाक्रम को पश्चिम में रूसी खुफिया नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा समन्वित कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। इन देशों ने यह कदम पूर्व रूसी खुफिया अधिकारी सर्गेई स्क्रिपल व उनकी बेटी यूलिया की सेल्सिबरी में 4 मार्च को रासायनिक हमले से हत्या के प्रयास के विरोध में उठाया है।