गृहयुद्ध की आग में झुलसे अफगानिस्तान में आतंकवाद और इस्लाम कट्टरवाद के खौफ की वजह से अल्पसंख्यक हिंदू और सिख समुदाय के लोग तेजी से पलायन किया हैं। आलम यह है कि अफगानिस्तान में अब मुट्ठी भर हिंदू और सिख परिवार बचे हैं।
हिंदुओं की बात करें, तो अब अफगानिस्तान में 220 से भी कम हिंदू परिवार बचे हैं, जबकि 1992 में दो लाख 20 हजार हिंदू थे। आतंकवाद, इस्लामिक कट्टरवाद के खतरे और आर्थिक चुनौतियों के चलते हिंदू और सिख परिवार अपनी जन्मभूमि को छोड़कर पलायन को मजबूर हो रहे हैं।
अफगानिस्तान में तेजी से घट रहे हिंदू और सिख समुदाय पर ताजा हमले के तहत जगतार सिंह नामक सिख की हत्या की कोशिश की गई। अफगानिस्तान के काबुल शहर में जगतार सिंह अपनी हर्बल शॉप में बैठे थे, तभी एक शख्स आया और सीधे उनके गले पर चाकू रख दिया।
उसने जगतार सिंह को धमकी दी, ‘इस्लाम कबूल कर लो, वरना गला काट दिया जाएगा।’ आसपास खड़े लोगों और दूसरे दुकानदारों ने जगतार की जान बचाई। इसके अलावा पिछले सप्ताह तालिबान ने हेलमंड में हिंदुओं को पत्र भेजकर दो लाख अफगानी (2800 डॉलर) हर महीने देने को कहा।
इसके चलते कई हिंदू और सिख परिवार घर छोड़कर चले गए। सदियों से देश के व्यापार और कारोबार में अल्पसंख्यक अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
खौफ से होती है दिन की शुरुआत
दुकान पर बैठे जगतार सिंह
हर्बल शॉप चलाने वाले जगतार सिंह बताते हैं कि अफगानिस्तान में दिन की शुरुआत खौफ से होती है। अगर आप मुस्लिम नहीं हैं, तो कट्टरपंथियों की निगाह में इंसान नहीं हैं। जगतार सिंह का कहना है कि उनको समझ में नहीं आता कि वह क्या करें और कहां जाएं? नेशनल काउंसिल ऑफ हिंदूज एंड सिख्स के चेयरमैन अवतार सिंह के मुताबिक किसी जमाने में पूरे अफगानिस्तान में फैले रहे ये हिंदू और सिख परिवार अब अफगानिस्तान के काबुल, नांगरहार और गजनी में ही रह गए हैं।