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यहां तालिबान को काले बाजार में मिल जाती है सेना की वर्दी

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काबुल के एक बाज़ार में अफगान सेना की नई सैन्य वर्दियां बिक्री के लिए रखी हैं।
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माना जा रहा है कि इस साल हुए कई हमलों में चरमपंथियों ने इन्हीं सैन्य पोशाकों का इस्तेमाल किया हो। जून में राष्ट्रपति भवन पर हमला करने वाले चरमपंथी भी सैनिकों की वर्दी ही पहने थे।

इस हमले के दौरान सैन्य वेश में आए चरमपंथी काबुल के सबसे सुरक्षित इलाक़े में पहुंच गए थे। इससे अधिकारियों पर यह दबाव बढ़ गया है कि वे सेना की वर्दी का अवैध कारोबार बंद करवाएं।
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लेकिन जून में हुआ हमला इस बात का भी संकेत था कि प्रशासन चरमपंथियों के आगे नाकाम साबित हो रही है।

चरमपंथी हमलावर कार्रवाइयों में सालों से अफ़ग़ान और पश्चिमी सेनाओं के जवानों की पोशाकों का इस्तेमाल करते रहे हैं लेकिन जून में हुए हमले के दौरान उनके पास फ़र्ज़ी पहचान पत्र भी थे।

तालिबान ने अब अपने हमले अफ़ग़ान सुरक्षा बलों और काबुल में रह रहे वरिष्ठ अधिकारियों पर केंद्रित कर दिए हैं।

नकली सैन्य ड्रेस पहनकर हमला करना अब अफ़ग़ानिस्तान में एक देशव्यापी समस्या बनती जा रही है। इसी साल सैन्य वर्दी में आए चरमपंथियों ने दक्षिणी प्रांत उरुज़गान में 12 पुलिसवालों की हत्या कर दी थी और पंजशीर प्रांत में गवर्नर के घर पर हमला कर दिया था।

फ़र्ज़ी पहचान पत्र
इसी साल सितंबर के महीने में ही अफ़ग़ान पुलिसकर्मियों की वर्दी में आए दो चरमपंथियों ने एक शिया मस्जिद पर हमला किया। ये चरमपंथी एके 47, चाकुओं और विस्फोटकों से लैस थे।

इस सबके बावज़ूद आप अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में बड़ी आसानी से सेना की वर्दी और अन्य सामान ख़रीद सकते हैं।

काबुल के पुराने बाज़ार का सबसे व्यस्त इलाक़ा पुल-ए-ख़ेश्ती कालाबाज़ारी करने वाले व्यापारियों के लिए प्रसिद्ध है।

यहां मैंने अफ़ग़ान सेना से लेकर नाटो सैन्य बलों तक के जवानों की वर्दियां देखीं लेकिन मेरे पास कैमरा और रिपोर्टिंग से जुड़े अन्य उपकरण देखने पर व्यापारी जल्दबाज़ी में अपना सामान छुपाने लगे।

और पलक झपकते ही कालाबाज़ारी के सामान का नामो निशान भी नहीं था।

सेना की वर्दी बनाने में विशेष महारत रखने वाली एक दुकान में एक अफ़ग़ान पुलिसकर्मी ने बताया कि उन्होंने अपनी वर्दी भी इसी बाज़ार से ख़रीदी है।

अपनी पैंट के ठीक होने का इंतज़ार कर रहे अब्दुल रहमान कहते हैं, "उन्होंने कोई दस्तावेज़ नहीं मांगे। न पहचान पत्र और न ही कोई अन्य दस्तावेज़। बस पैसे लिए और वर्दी दे दी।"

रहमान के मुताबिक काला बाज़ार में एक वर्दी करीब पांच सौ अफ़ग़ानी (लगभग दस डॉलर) में मिल जाती है। यहां एक पुलिसकर्मी की तनख़्वाह लगभग 200 डॉलर प्रति महीना से शुरू होती है।

सेना से जुड़े प्रतीक चिन्ह एक डॉलर से भी कम में मिल जाते हैं।

आमतौर पर सैन्य वर्दियाँ आंतरिक एवं रक्षा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाई जाती हैं लेकिन जब स्टॉक कम होता है तो पुलिस और सेना के जवानों को वर्दी हासिल करने के दस्तावेज़ ज़ारी कर दिए जाते हैं जिनके ज़रिए वे अधिकृत दुकानों से तुरंत वर्दी हासिल कर सकते हैं।

काबुल के पुराने बाज़ार में सैन्य वर्दियाँ सिलने और ठीक करने वाले दर्ज़ियों की करीब पचास दुकानें हैं।

दर्ज़ियों की यूनियन के मुखिया एम हकीम कहते हैं कि यूं तो सभी दुकानों पर उनका पूरा नियंत्रण है लेकिन फिर भी उन्हें नज़र रखनी पड़ती है।

वे कहते हैं, "मैं उन्हें कोई गैर क़ानूनी काम नहीं करने देता। अगर उन पर नज़र न रखी जाए तो वे बंदूके भी बेचने लगेंगे।"

लाइसेंस
सुरक्षा एजेंसियां अब दर्जियों को लाइसेंस जारी कर वर्दियों के अवैध कारोबार पर नियंत्रण करने का प्रयास कर रही हैं। ये सिर्फ़ सेना और पुलिस से ही ऑर्डर ले सकते हैं।

एक लाइसेंस प्राप्त टेलर इब्राहिम कहते हैं कि यह तरीका कुछ हद तक काम करता है लेकिन कालाबाज़ारी को नियंत्रित करना लगभग नामुमकिन है।

वे कहते हैं कि लाइसेंसधारी दुकानदार खरीददार से पहचान पत्र या सैन्य दस्तावेज मांगता है लेकिन काला बाज़ार में कोई क़ानून नहीं चलता है।

एक अन्य दुकानदार मोहम्मद ज़रीफ़ कहते हैं कि पहले से ही वर्दी में आए खरीददार से वे पहचान पत्र नहीं मांगते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि उन्हें कैसे पता चलता है कि वर्दी में आया खरीददार सेना से ही जुड़ा है तो वे कहते हैं, "ये जांच करना मेरी ज़िम्मेदारी नहीं है। सरकार को इसे रोकना चाहिए। जब सरकार ही नहीं रोक पा रही है तो मैं कैसे रोक सकता हूं।"
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अधिकारी कहते हैं कि वे इस कालाबाज़ारी को रोकने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

इस समस्या का एक ख़तरनाक पहलू यह भी है कि कुछ जवान ही बाज़ार में अपनी वर्दियां बेच देते हैं।

आंतरिक मंत्रालय का कहना है कि वे नियमित चैकिंग अभियान चलाता है।

हम दो घंटे तक काला बाज़ार में रहे और इस दौरान कोई पुलिसकर्मी नज़र नहीं आया। ऐसे में व्यापारियों को लग सकता है कि अवैध वर्दियां बेचने का ख़तरा उठाना फायदा का सौदा हो सकता है।
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