अफ़ग़ानिस्तान की एक अपीली अदालत ने एक महिला की पत्थर मार कर हत्या के मामले में चार लोगों की मौत की सज़ा को रद्द कर दिया है।
फरखुंदा मलिकज़ादा को काबुल में एक दरगाह पर कुछ लोगों की भीड़ ने पत्थर मार-मार कर मारा डाला था। इतना ही नहीं, उनके शव को कार से कुचलने के बाद आग के हवाले कर दिया गया था।
फरखुंदा पर क़ुरान की एक प्रति को जलाने का ग़लत आरोप लगा था। दरगाह के ख़ादिम को भी अदालत ने बरी कर दिया, जिनसे फरख़ुंदा की कहासुनी हुई थी। फरखुंदा के परिजनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अदालत के फैसले पर रोष जताया है।
बुधवार को काबुल की अपीली अदालत ने बंद दरवाज़ों के पीछे गोपनीय तरीके से ये फैसला सुनाया। स्थानीय मीडिया का कहना है कि अदालत ने मौत की सज़ा को 20-20 साल कैद की सज़ा में तब्दील कर दिया है।
अदालत ने दरगाह के ख़ादिम ओमरान को बरी कर दिया है. ओमरान पर ही लोगों को भड़काने का आरोप है जिसके बाद भीड़ ने फरखुंदा की हत्या कर दी। फुरखुंदा के भाई नजीबुल्लाह ने कहा, "ये अदालत नहीं है, सिर्फ तमाशा है। मीडिया को वहां होना चाहिए था, हमें वहां होना चाहिए था, वकीलों को वहां होना चाहिए था।"