फिलहाल हर दिन काठमांडू की सड़कों पर डॉ केसी के सत्याग्रह के समर्थन और नेपाली सरकार के विरोध में डॉक्टर, विद्यार्थी और आम नागरिकों का जुलूस निकलता है। संसद में विपक्षी दल कांग्रेस डॉ केसी के पक्ष में आवाज बुलंद कर रही है। हालांकि सत्ताधारी केपी शर्मा ओली की सरकार फिलहाल डॉ केसी के अनशन के सामने झुकने को तैयार नहीं है।
विपक्ष का समर्थन हासिल :
वर्तमान कांग्रेस सांसद और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री गगन थापा ने अमर उजाला से कहा कि डॉ केसी फकीर हैं। वो राजनीति से ऊपर उठे हुए गांधीवादी संत हैं। देशवासियों के स्वास्थ्य के उत्थान के लिए वे सत्याग्रह करते आ रहे हैं। थापा ने कहा कि यदि उनको कुछ हो जाता है तो नेपाली जनता सत्ता को कभी माफ नहीं करेगी। बता दें कि डॉ केसी के स्वास्थ्य की स्थिति फिलहाल जटिल है।
लोगों की करते हैं मदद :
विश्व के किसी भी भाग में भूकंप, सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएं आने पर डॉ केसी खुद के खर्च पर ही चिकित्सा सेवा देने के लिए निकल पड़ते हैं। त्रिवि शिक्षण अस्पताल, काठमांडू में अर्थोपेडिक के प्राध्यापक रहे डॉ केसी अपने वेतन में से हर महीने खुद पर मात्र 6 हजार भारतीय रुपये खर्च करते हैं। बचे हुए पैसे से वो नेपाल के दुर्गम पहाड़ी जिलों में या विदेश में प्राकृतिक आपदा होने के समय जाकर स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। सरकारी आवास में रहने वाले डॉ केसी के पास संपत्ति के नाम पर कुछ भी नहीं है। उन्होंने कभी निजी प्रैक्टिस भी नहीं की।
सरकार को झुकना पड़ता है :
डॉ केसी के हर सत्याग्रह पर सरकार को झुकना पड़ा है। इससे पहले भी 14 बार उनकी सभी मांगे मानने के लिए सरकार ने लिखित आश्वासन दिया था। हालांकि अनशन तोड़ते ही सरकार अपने वादों से मुकर जाती है। वहीं कुछ दिनों के इंतजार के बाद मांगे पूरी हो न पर वे एक बार फिर से सत्याग्रह करने को बाध्य हो जाते हैं।