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एक ऐसा देश, जहां खौफ के साए में जी रहे हैं भारतीय

Mon, 19 Aug 2013 11:36 AM IST
बीबीसी
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कीनिया यात्रा के दौरान हवाई जहाज़ में हमारी मुलाकात मोज़ांबिक में आठ साल से कारोबार कर रहे हैदराबाद के रघुराम रेड्डी से हुई। पिछले साल ही उनका अपहरण हो गया था।
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मापुटो के जिमपेट इंडस्ट्रियल एरिया में एक कंपनी चलाने वाले रघुराम रेड्डी को छह दिन तक अपहर्ताओं ने अपनी क़ैद में रखा था। उनसे 10 लाख डॉलर (करीब छह करोड़ रुपये) की फ़िरौती मांगी गई थी।

रघुराम इतना पैसा नहीं दे सकते थे और मोज़ांबिक में मौजूद भारतीय दूतावास से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली।

उनके घरवालों ने जैसे-तैसे उनकी रिहाई के एवज़ में 20 हज़ार डॉलर (12 लाख रुपये) दिए तब जाकर उन्हें अपहर्ताओं के चंगुल से छुड़ाया जा सका।

बीबीसी से बातचीत में रघुराम रेड्डी कहते हैं कि मोज़ांबिक के बेहतर होते हालात के कारण उन्होंने कुछ साल पहले वहाँ कारोबार की शुरुआत की थी।

कुछ साल तक उनका अनुभव अच्छा रहा और लोग भी दोस्ताना तरीके से मिले लेकिन रेड़्डी के अनुसार पिछले दो सालों से उन्हें और उन जैसे दूसरे कई भारतीयों को काफ़ी दिक़्क़तें आ रही हैं।
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वो कहते हैं, "भारतीयों और एशियाइयों को खासकर ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ अपहरण और हमले जैसी घटनाएं हो रही है। हमसे घर पर और रास्ते में मोबाइल वगैरह छीन लिया जाता है या मारपीट की जाती है। पिछले दो सालों से मोजांबिक में क़ानून-व्यवस्था ठीक नहीं है। यहां स्थिति बहुत खराब हो गई है। हमने पुलिस से भी शिकायत की लेकिन यहां पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती।’

अफ़्रीकी देश मो़ज़ांबिक में रह रहे भारतीयों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में उनकी सुरक्षा को खतरा बढ़ गया है लेकिन सरकारी अधिकारी दावा करते हैं कि देश में निवेश बढ़ाने के लिए वो हर संभव प्रयास कर रहे हैं जिसमें कानून-व्यवस्था को सुधारना शामिल है।

छह दिन तक बंधक रखा
अपहर्ताओं ने रघुराम रेड्डी को छह दिन अपने क़ब्ज़े में रखा था।

रघुराम बताते हैं, "करीब छह बजे मैं घर के बाहर आ रहा था, तभी दो गाड़ियां आईं। उसमें से आठ लोग निकले और बंदूक दिखाकर मुझे घर में ले आए। उन्होंने मेरे भाई की आंख में स्प्रे कर दिया जिसकी वजह से वह कुछ नहीं देख पाया। इसके बाद वो मुझे ले गए और छह दिन तक बंधक बनाए रखा। ये लोग मुझसे 10 लाख डॉलर (करीब छह करोड़ रुपये) मांग रहे थे लेकिन मेरी ऐसी आर्थिक स्थिति नहीं थी कि मैं इतना पैसा दे सकूं।"

रघुराम ने बताया कि उन्होंने पैसे मंगवाने के लिए अपने भाई को फ़ोन किया था जो मोज़ांबिक के मापुटो शहर में अपने रिश्तेदारों के साथ रहते हैं।

वो बताते हैं कि भाई ने मदद लेने की कोशिश की लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ।

'पुलिस ने मदद नहीं की'
मापुटो के पोलाना इलाक़े में रहने वाले रघुराम रेड्डी को अपहर्ताओं ने वहीं की एक झुग्गी बस्ती में रखा था।

रेड़्डी के मुताबिक जब उनके भाई को भारतीय दूतावास से कोई मदद नहीं मिली तो उन्होंने स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी दी। फ़ोन कॉल को ट्रैक करने से पता चला कि फ़ोन एक स्लम इलाक़े से किया गया था।

रघुराम के मुताबिक़ इतना सब कुछ जानने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने उन्हें ढूंढने की कोशिश नहीं की।

रघुराम के मुताबिक़ अपहर्ताओं ने उनके साथ बेहद बुरा सुलूक किया।

वो कहते हैं, "ये बहुत खतरनाक अनुभव था। उन्होंने मुझे खाना नहीं दिया। मुझे मारा-पीटा, पानी में डुबाया और डराया-धमकाया। छह दिन बाद उन्हें लग गया था कि मेरे घर की तरफ़ से कोई पैसा नहीं आ रहा क्योंकि मैं बड़ा आदमी नहीं हूं। इसके बाद मेरे भाई ने उन्हें क़रीब 20 हजार डॉलर दिए, तब जाकर मुझे छुड़ाया जा सका।"

'बार-बार निशाना'
रघुराम रेड्डी अकेले भारतीय नहीं हैं जिनके साथ ऐसी घटना हुई। उनका कहना है कि मोज़ांबिक में बहुत से भारतीयों का अपहरण हो चुका है और उन्हें लगता है कि भारतीय अपहर्ताओं के निशाने पर हैं।

रघुराम के मुताबिक़, "चीनी लोग व्यापार में नहीं हैं। मोज़ांबिक में भारतीय व्यापारी निर्माण और कारोबार के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसके अलावा पैसे के लेन-देन में भारतीय और पाकिस्तानी हैं। इसीलिए उन्हें निशाना बनाया जाता है।"
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वह कहते हैं, "मोज़ांबिक में भारतीय डरे हुए हैं। जब तक सही कार्रवाई नहीं होती, ये वारदातें नहीं रुकेंगी।"

रेड्डी का कहना है कि इसी डर की वजह से कई भारतीय वहाँ नहीं रहते और मोज़ांबिक आते-जाते रहते हैं और कई तो कारोबार बंद कर वापस चले गए हैं।
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