सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थाई सीट लेने से मना कर दिया है।
ये ऐलान करते हुए सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र पर ‘दोहरे मापदंड’ इस्तेमाल करने वाली विश्व संस्था होने का आरोप लगाया है।
मंत्रालय के मुताबिक पहले संयुक्त राष्ट्र में सुधार होना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा परिषद ने सीरिया समेत विश्व के कई और संघर्षों की ओर अपना कर्तव्य नहीं निभाया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि उन्हें सऊदी अरब के फैसले की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है हालांकि उन्हें कुछ सदस्य देशों के बीच इस बारे में चर्चा होने की जानकारी है।
सऊदी अरब के इस फैसले पर कूटनीतिज्ञों ने हैरानी जाहिर की है। संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के दूत गेरार्ड अराउद ने कहा कि सऊदी अरब सुरक्षा परिषद में बहुत सकारात्मक योगदान दे सकता था।
एएफपी समाचार एजेंसी को अराउद ने बताया, “हम सऊदी अरब की निराशा भी समझते हैं क्योंकि सच्चाई ये है कि सुरक्षा परिषद पिछले दो सालों से काम नहीं कर पाई है।”
नाटकीय विरोध
वहीं रूस के विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब की ओर से की गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सीरिया से जुडे फैसलों की आलोचना को “खास तौर से अजीब” बताया।
आम तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 10 अस्थाई सीटों में से एक के लिए चुने जाने पर बहुत प्रतिस्पर्धा होती है।
ये संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च संस्था के पांच स्थाई सदस्यों के साथ बैठकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर काम करने का मौका होता है। सऊदी अरब इस सीट के लिए पहली बार चुना गया है।
बीबीसी की कूटनीति संवाददाता ब्रिजेट केंडेल के मुताबिक, “सऊदी अरब ने ये सीट ना लेकर इस मौके का इस्तेमाल एक बेहद सार्वजनिक विरोध करने के लिए किया है लेकिन ये साफ नहीं है कि इस नाटकीय ढंग से रखी संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग पर फौरन अमल किया जाएगा या नहीं।”
इससे पहले इसी महीने सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने ऐसी ही निराशा जताते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने से भी मना कर दिया था।
‘संयुक्त राष्ट्र की असफलताएं’
सऊदी अरब सीरिया के विद्रोहियों का पुरजोर समर्थन करता है, सीरिया पर दुनिया की बडी ताकतों के कोई ‘ठोस कदम’ ना लेने पर वो अपनी निराशा व्यक्त करता रहा है।
इसके अलावा सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र पर पिछले ‘65 सालों में फलस्तीन समस्या का हल’ ना निकाल पाने का आरोप लगाया।
मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा मध्य-पूर्व के देशों से परमाणु हथियार समेत महाविनाश के अधिकार खत्म ना कर पाने की भी आलोचना की।
साथ ही संयुक्त राष्ट्र पर सीरिया की सरकार को “अपने ही लोगों को रासायनिक हथियारों से मारने देने” का आरोप लगाया और कहा कि “सीरियाई सरकार को रोकने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं लगाए गए”।
पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सीरिया में संघर्ष को रोकने पर ढाई साल से बने गतिरोध को तोडा और सर्वसहमति से उस देश से रासायनिक हथियार हटाने का प्रस्ताव पारित किया।