एक नए अध्ययन के अनुसार, मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) अजन्मे शिशुओं के सिर, गर्दन, वक्ष, पेट और रीढ़ की हड्डी में विकृतियों का अधिक सटीक रूप से पता लगा सकती है। इस अध्ययन का निष्कर्ष लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ पत्रिका में प्रकाशित हुआ। बता दें, इस बहुआयामी अध्ययन का नेतृत्व किंग्स कॉलेज लंदन ने एल्विना लंदन चिल्ड्रन हॉस्पिटल, ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल और यूसीएल के साथ किया।
अध्ययन के जरिये शोधकर्ताओं और चिकित्सकों की एक टीम ने उन तरीकों के बारे में बताया जिसकी मदद से एमआरआई स्कैनिंग के दौरान विकृतियों का विस्तार से पता लगाया जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं के लिए एमआरआई एक बहुत ही सुरक्षित प्रक्रिया है।
अध्ययन रिपोर्ट में लिखा गया है कि अजन्मे बच्चों की देखभाल करने वाले चिकित्सकों और प्रसव के बाद शिशुओं की देखभाल की योजना बनाने वाली टीमों के लिए एमआरआई उपयोगी प्रक्रिया है। इस शोध में भ्रूण के मस्तिष्क और हृदय की इमेजिंग पर एमआरआई के जरिये ध्यान केंद्रित किया गया है। हालांकि, इन दिनों एमआरआई के जरिये पूरे भ्रूण का आकलन करने की मांग बढ़ रही है।
वहीं, एल्विना लंदन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में किंग्स कॉलेज लंदन स्कूल ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और इमेजिंग साइंसेज द्वारा किए गए शोध के बाद अब पूरे भ्रूण के शरीर के आकलन के लिए एक पाइपलाइन विकसित करने में सफलता पाई गई है।
स्कूल ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एंड इमेजिंग साइंसेज के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर मैरी रदरफोर्ड ने कहा, ‘अल्ट्रासाउंड भ्रूण की जांच के लिए सोने का मानक है और वास्तव में भ्रूण शरीर की असामान्यताओं के मूल्यांकन के लिए इन अनुकूलित एमआरआई दृष्टिकोणों का पूरक है।’
उन्होंने आगे कहा कि अब तक अल्ट्रासाउंड भ्रूण के शरीर की विसंगतियों का पता लगाने के लिए पसंद किया जाता रहा है। हालांकि, कभी-कभी सबसे विस्तृत शरीर की रचना को समझने के लिए अल्ट्रासाउंड की क्षमता सीमित होती है। ऐसे में एमआरआई स्कैनिंग अधिक सटीक विकृति को परिभाषित करने की क्षमता देती है।