पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने गुरुवार को घोषणा की कि सेना और सरकारी इमारतों पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ प्रतिदिन जेल में सुनवाई होगी। इसके साथ ही सरकार ने इस जघन्य अपराध में शामिल दोषियों के लिए किसी भी तरह की नरमी से इनकार किया। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद नौ मई को सैन्य प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों में शामिल लोगों के खिलाफ सेना कानून के तहत मुकदमा चलाए जाने के लिए संघीय कैबिनेट ने पिछले महीने मंजूरी दी थी।
पंजाब के कार्यवाहक मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि नौ मई को हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार संदिग्धों पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत रोजाना जेल में सुनवाई होगी। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को जेल में मुकदमे की सुनवाई के बारे में सूचित कर दिया गया है। उन्होंने पुलिस और अभियोजन विभागों को आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने का निर्देश देते हुए कहा कि हम नौ मई के हमलों में शामिल दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी लाना चाहते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी अपराधी के प्रति नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज करने के आदेश दिए गए हैं। पंजाब सरकार का दावा है नौ मई के दंगों के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के 3,000 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। उनमें से 1,400 संदिग्धों को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया है।