फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्रिटिश उपन्यासकार जेफ्री आर्चर का निधन: कलम से पाई शोहरत, सियासत से विवाद और जेल तक; ऐसा रहा जीवन का सफर

Tue, 06 Oct 2026 09:00 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

अपनी आखिरी किताब एडम और ईव' के वैश्विक रिलीज से ठीक एक दिन पहले ब्रिटेन के मशहूर लेखक और पूर्व राजनेता पहले जेफ्री आर्चर का निधन हो गया। जेफ्री आर्चर का लेखकीय सफर करीब पांच दशक लंबा रहा। उनकी पहली किताब वर्ष 1976 में प्रकाशित हुई थी।

विज्ञापन
नहीं रहे जेफ्री आर्चर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ब्रिटेन के मशहूर लेखक और पूर्व राजनेता जेफ्री आर्चर का 86 साल की उम्र में निधन हो गया। अपनी किताबों से दुनिया भर में पहचान बनाने वाले आर्चर का राजनीतिक जीवन झूठी गवाही के मामले में जेल जाने के बाद विवादों में घिर गया था। प्रकाशक हार्पर कॉलिन्स ने बताया कि आर्चर का सोमवार को उनके घर पर निधन हुआ। खास बात यह है कि उनकी आखिरी किताब 'एडम और ईव' के वैश्विक रिलीज से ठीक एक दिन पहले उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

विज्ञापन


पांच दशक तक किताबों की दुनिया में छाए रहे
जेफ्री आर्चर का लेखकीय सफर करीब पांच दशक लंबा रहा। उनकी पहली किताब 'नॉट ए पेनी मोर, नॉट ए पेनी लेस' 1976 में प्रकाशित हुई थी। यह उपन्यास उनके उस दौर से प्रेरित बताया जाता है, जब खराब निवेश के चलते वह लगभग दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए थे। इसके बाद 'केन एंड एबेल' समेत उनकी कई किताबें बेहद लोकप्रिय हुईं। हार्पर कॉलिन्स के अनुसार, आर्चर की किताबों की दुनिया भर में करीब 30 करोड़ प्रतियां बिकीं। वह ब्रिटेन की 'संडे टाइम्स' बेस्टसेलर सूची में 14 साल पांच महीने और 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की सूची में पांच साल से ज्यादा समय तक बने रहे।

साहित्य के साथ राजनीति में भी बनाई पहचान
आर्चर ने लेखन के साथ ब्रिटेन की राजनीति में भी मजबूत जगह बनाई। वह प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर के दौर में कंजर्वेटिव पार्टी में तेजी से आगे बढ़े। 1992 में थैचर के उत्तराधिकारी प्रधानमंत्री जॉन मेजर ने उन्हें हाउस ऑफ लॉर्ड्स का सदस्य बनाया। लेकिन बाद में एक कानूनी विवाद ने उनके राजनीतिक करियर को गहरा झटका दिया।
विज्ञापन


झूठी गवाही ने पहुंचाया जेल
1999 में लंदन के मेयर पद के लिए चुनाव लड़ते समय आर्चर पर पुराने मानहानि मामले में अदालत को गुमराह करने का आरोप सामने आया। उन्होंने एक अखबार पर मुकदमा किया था, जिसने उन पर एक यौनकर्मी को पैसे देने का आरोप लगाया था। वह मुकदमा जीत गए थे और उन्हें 5 लाख पाउंड का हर्जाना मिला था। बाद में जूरी ने पाया कि उन्होंने 1987 के मामले में अपने पक्ष में झूठी कहानी और फर्जी अलिबी तैयार किया था। 2001 में उन्हें झूठी गवाही के लिए चार साल की सजा हुई। वह दो साल से कुछ अधिक समय जेल में रहे और 2003 में रिहा हुए।

जेल के अनुभवों को भी किताबों में बदला
जेल से लौटने के बाद भी आर्चर ने लेखन जारी रखा। उन्होंने जेल के अनुभवों पर तीन हिस्सों वाली 'अ प्रिजन डायरी' लिखी, जिसमें 'हेल', 'परगेटरी' और 'हेवन' शामिल थे। इन किताबों में ब्रिटेन की जेलों और कैदियों की जिंदगी की झलक देखने को मिली।

राजघराने के उत्तराधिकार नियम पर भी छोड़ी छाप
आर्चर ने राजघराने में बेटियों को बेटों के बराबर उत्तराधिकार का अधिकार देने की मांग भी उठाई थी। उनके प्रयासों से जुड़ी बहस ने 2013 के सक्सेशन टू द क्राउन एक्ट की राह मजबूत करने में भूमिका निभाई। इस कानून ने छोटे बेटों को बड़ी बेटियों से आगे रखने की सदियों पुरानी परंपरा खत्म कर दी।

ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया संकट: सऊदी अरब पर हूतियों ने दागीं मिसाइलें, रियाद एयरपोर्ट और अरामको रिफाइनरी को बनाया निशाना
विज्ञापन


आखिरी किताब में भी दिखी असमानता की कहानी
आर्चर की अंतिम किताब 'एडम और ईव' में भी वर्ग और लैंगिक भेदभाव जैसे मुद्दे नजर आते हैं। कहानी एक अर्ल की बेटी और एक चरवाहे के बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है। अर्ल बेटा चाहता है ताकि संपत्ति आगे बढ़ा सके, जबकि चरवाहा बेटी चाहता है क्योंकि उसे डर है कि बेटा युद्ध में भेज दिया जाएगा। आर्चर ने इस किताब को अपने लेखन का सबसे संतोषजनक काम बताया था। उनके परिवार में उनकी पत्नी डेम मैरी आर्चर, दो बेटे, दो पोतियां और तीन पोते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें