अदालत ने दी राहत (सांकेतिक तस्वीर)
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मार्च 2011 में जापान में आई फुकुशिमा आपदा मामले में अदालत ने बिजली कंपनी के पूर्व अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कंपनी की ओर से अधिकारियों के खिलाफ किए गए क्षतिपूर्ति के दावे को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि सुनामी से तबाह हुए फुकुशिमा दाइची परमाणु ऊर्जा संयंत्र का प्रबंधन करने वाली कंपनी के पूर्व अधिकारी आपदा के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। उन्हें कंपनी को क्षतिपूर्ति देने की आवश्यकता नहीं है।
टोक्यो हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। 2022 में निचली अदालत ने अपने फैसले में टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी होल्डिंग्स (TEPCO) के चार पूर्व अधिकारियों को कंपनी को 13 ट्रिलियन येन (90 बिलियन डॉलर) का भुगतान करने का आदेश दिया था। फैसले में कहा गया था कि वे सुनामी के बाद गंभीर दुर्घटना के जोखिम को जानने के बाद भी सुरक्षा सावधानी नहीं बरत सके।
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टोक्यो जिला अदालत ने पूर्व कंपनी को फुकुशिमा आपदा के लिए जिम्मेदार ठहराया था। कोर्ट ने कंपनी की दलील को सही बताते हुए कहा कि अधिकारियों ने विशेषज्ञों की सुनामी की चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया और बचाव के लिए सही प्रयास नहीं किए। न्यायालय ने कहा कि सुनामी पूर्वानुमान के बाद अधिकारियों को उस समय उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तत्काल कार्रवाई करने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
हाईकोर्ट के फैसले ने फुकुशिमा निवासियों और परमाणु सुरक्षा में प्रबंधन की जिम्मेदारी की मांग करने वाले परमाणु विरोधी कार्यकर्ताओं को बड़ा झटका दिया है। कंपनी और उनके वकीलों ने फैसले को अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे। वकील हिरोयुकी कावई ने फैसले को तार्किक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि फैसले से साफ है कि किसी भी सुरक्षा लापरवाही के लिए किसी को भी उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि सुनामी और भूकंप की भविष्यवाणी आज भी असंभव है।
शेयरधारकों ने दायर किया था मुकदमा
टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी होल्डिंग्स (TEPCO) के 40 से अधिक शेयरधारकों के एक समूह ने 2012 में मुकदमा दायर किया था। इसमें पांच पूर्व अधिकारियों से कंपनी को 22 खरब येन (153 अरब डॉलर) हर्जाना देने की मांग की गई थी। चार अधिकारियों के खिलाफ 2022 के फैसले की राशि किसी भी मुकदमे में अब तक की सबसे ज्यादा थी। मार्च में जापान की शीर्ष अदालत ने दो पूर्व अधिकारियों को फुकुशिमा में हुई दुर्घटना के मामले में लापरवाही बरतने का दोषी नहीं पाया। कोर्ट ने कहा कि प्लांट में आई सुनामी की तीव्रता का अंदाजा लगाना असंभव था। यह परमाणु दुर्घटना से संबंधित एकमात्र आपराधिक मुकदमा और एकमात्र आपराधिक मामला था।
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पिघल गए थे तीन रिएक्टर
मार्च 2011 में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और सुनामी ने फुकुशिमा दाइची संयंत्र के तीन कूलिंग सिस्टम को नष्ट कर दिया था। इसके तीन रिएक्टर पिघल गए थे। इससे क्षेत्र में बड़ी मात्रा में रेडिएशन फैला। रेडियोधर्मी संदूषण और अन्य सुरक्षा चिंताओं के कारण हजारों निवासी घर वापस नहीं लौट सके।