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Saudi Arabia: बिगड़ते ही जा रहे अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्ते, तेल कटौती बन रही वजह

Sun, 16 Oct 2022 02:59 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेद्दा

सार

यूक्रेन संकट खड़ा होने के बाद दुनिया में पैदा हुए ऊर्जा संकट से अपने देशवासियों को राहत दिलाने की कोशिश में बाइडेन ने सऊदी अरब को तेल उत्पादन का स्तर बनाए रखने की सलाह दी थी।  लेकिन सऊदी अरब ने अनुरोध को ठुकरा दिया।
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जो बाइडन और सलमान बिन अब्दुलअजीज - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में तीखी कड़वाहट घुल गई है। हाल में कच्चे तेल का उत्पादन घटाने के सऊदी अरब के निर्णय को अमेरिका अपने गले नहीं उतार पा रहा है। जबकि सऊदी अरब भी अब चुपचाप उसकी आलोचना सुनने को तैयार नहीं है।  सऊदी अरब के इस आरोप से पश्चिमी देशों में जनमत के एक हिस्से में हलचल मची है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने तेल उत्पादन में कटौती का फैसला एक महीना टालने की गुजारिश की थी। इसका यह मतलब निकाला गया है कि बाइडन चाहते थे कि अमेरिका में होने वाले मिड टर्म चुनाव किसी तरह गुजर जाएं और फिर सऊदी अरब ये फैसला ले। मिड टर्म चुनावों के लिए मतदान आठ नवंबर को होगा। सऊदी अरब ने यह आरोप बाइडन के यह कहने के बाद लगाया कि अमेरिका अब सऊदी अरब के साथ अपने रिश्तों की समीक्षा करेगा। 

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सऊदी अरब सरकार ने लंबा बयान जारी किया
सऊदी अरब सरकार ने इस टिप्पणी के बाद एक लंबा जवाबी बयान जारी किया। उसमें उसने आरोप लगाया कि बाइडन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक+ ने पिछले दिनों कच्चे तेल के उत्पादन में रोजाना 20 लाख बैरल की कटौती का फैसला किया था। उन्होंने ये फैसला अमेरिका के अनुरोध को ठुकराते हुए किया। इससे बाइडन प्रशासन भड़क गया। उसने सऊदी अरब पर रूस के पक्ष में खड़ा हो जाने का इल्जाम लगाया।  सऊदी अरब ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि अगर ‘अमेरिका के सुझाव के मुताबिक उत्पादन घटाने का फैसला एक महीने टाल दिया गया होता’ तो उसके नकारात्मक आर्थिक प्रभाव होते। 

 सऊदी अरब के बयान पर भड़का अमेरिका
गौरतलब है कि यूक्रेन संकट खड़ा होने के बाद दुनिया में पैदा हुए ऊर्जा संकट से अपने देशवासियों को राहत दिलाने की कोशिश में बाइडेन ने सऊदी अरब को तेल उत्पादन का स्तर बनाए रखने की सलाह दी थी।  सऊदी अरब के इस बयान पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने कहा- ‘सऊदी विदेश मंत्रालय तथ्यों को घुमा या लोगों का ध्यान बहका सकता है। लेकिन तथ्य बहुत सरल हैं।
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हाल के हफ्तों में सऊदी नेताओं ने हमें निजी और सार्वजनिक तौर बताया कि वे तेल उत्पादन घटाना चाहते हैं। उन्हें मालूम है कि ऐसा करने से रूस की आमदनी बढ़ेगी और पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों का असर कमजोर होगा। इस तरह सऊदी अरब ने गलत दिशा अपना ली है।’ किर्बी ने दावा किया कि ओपेक के सदस्य दूसरे देशों ने अमेरिका को बताया था कि वे सऊदी अरब के निर्णय से असहमत हैँ। लेकिन सऊदी अरब ने जबरन उन्हें अपने फैसले पर राजी कर लिया। पश्चिमी विश्लेषकों ने कहा है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच अब सबसे गंभीर विवाद पैदा हो गया है। इसके अमेरिका की पश्चिमी एशिया रणनीति पर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

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