ग्रीस के शरणार्थी शिविरों में क्षमता से ज्यादा लोगों के रहने के चलते इनकी हालत खराब हो गई है। यहां अपने परिवार से बिछड़े कई बच्चे रह रहे हैं जिनमें से कई के परिजन तक जीवित नहीं हैं। यूरोपीय आयोग ने जर्मनी से अपील की है कि वह ग्रीस के शरणार्थी शिविरों में तय संख्या से ज्यादा रह रहे बच्चों को अपने देश में पनाह दे।
यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ने शरणार्थी शिविरों में रह रहे बच्चों की हालत पर चिंता जताई। आयोग ऐसे द्वीपों को लेकर चिंतित है जहां बच्चे विकट हालातों में जी रहे हैं। विशेष रूप से 5000 बच्चे ऐसे हैं जिनके साथ परिवार का कोई और सदस्य नहीं है।
प्रवक्ता ने यहां तक कहा है कि यदि जर्मनी इन बच्चों को अपने यहां जगह देता है तो यूरोपीय आयोग उसे आर्थिक मदद भी देगा। उधर, जर्मनी की ग्रीन पार्टी ने सरकार से इन बच्चों को देश में लाने की अपील की है लेकिन सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी ईयू के सदस्य देशों से इन बच्चों की मदद की अपील की है।
हजारों बिछड़े बच्चे
यूरोपीय संघ के आंकड़ों के मुताबिक ग्रीस के लेस्बोस, कायोस, समोस, लेरोस और कोस द्वीपों पर करीब 2000 ऐसे बच्चे मौजूद हैं जिनके साथ उनका कोई परिजन नहीं है। नवंबर तक आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पूरे ग्रीस में ऐसे कुल 5,276 बच्चे हैं। इन बच्चों में से नौ फीसदी 14 साल की उम्र से कम के हैं। कुल बच्चों में से 92 फीसदी लड़के हैं।
तस्करी का डर
जर्मनी के गृह मंत्री होर्स्ट जेहोफर ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि जर्मनी पहले से ही ग्रीस की इस विषय में बहुत मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ जर्मनी के मदद करने से हालात और खराब होंगे जिन्हें सामान्य नहीं किया जा सकेगा। उनके मुताबिक, ऐसा करने से तस्कर भी सक्रिय हो जाएंगे और वे बच्चों की यहां तस्करी करने लगेंगे।