अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया में सुधार एक बड़े सियासी टकराव का मुद्दा बन गया है। इस सवाल पर दोनों बड़ी पार्टियां अपने-अपने ढंग से सुधार प्रस्तावों को आगे बढ़ा रही हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे को स्वीकार ना करने के बाद से ये मसला गरम है। पिछले दिनों रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले कई राज्यों में ऐसे बिल पारित किए गए, जिनमें डाक से वोटिंग और मतदान की तारीख से पहले मतदान को मुश्किल बनाने के प्रावधान शामिल हैं। रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि पिछले चुनाव में लाखों लोगों ने समय से पहले या डाक से मतदान किया, जिससे चुनाव की साख खत्म हो गई।
अब अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में ‘फॉर द पीपुल एक्ट’ पास किया गया है। इस सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत है। ये बिल बुधवार को सदन में 220-210 वोटों के अंतर से पास हुआ। इस बिल में मतदान की तारीख से पहले मतदान और डाक से मतदान की मुश्किलें बढ़ाने के प्रावधान हैं। साथ ही वोटरों को मतदान के दिन तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा देने और रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड्स के आधार पर नामों को मतदाता सूची से हटाने पर रोक के प्रावधान शामिल हैं।
ये बिल अगर कानून बन गया, तो मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन और मतदान की तारीख से पहले वोट डालने के बारे में राष्ट्रीय मानक तय हो जाएंगे। तब राज्य उसके खिलाफ जाकर अपने नियम नहीं लागू कर सकेंगे। बिल में अपनी सजा पूरी कर चुके सजायाफ्ता लोगों के लिए मतदान को आसान बनाने का प्रावधान भी है।
हाउस से पास बिल में यह प्रावधान भी है कि राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुने गए व्यक्तियों के लिए अपने टैक्स रिटर्न जारी करना अनिवार्य होगा। गौरतलब है कि ट्रंप ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। इसमें विदशी नागरिकों को अमेरिकी चुनाव में खर्च करने से रोकने के नियमों को सख्त करने की बात भी कही गई है।
बिल को हाउस ने बुधवार को मंजूरी दी। इसके पहले सोमवार को बाइडन प्रशासन ने कहा था कि अमेरिका में लोकतंत्र पर हमले का अभूतपूर्व खतरा मंडरा रह है। इसलिए इस विधेयक का तुरंत पास होना जरूरी है, ताकि लोगों के मताधिकार और चुनावों की साख की रक्षा हो सके। दूसरी तरफ कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कांफ्रेंस में भाषण देते हुए पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को कहा था कि डाक से वोट और तय तारीख से पहले मतदान पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए।
अब ये बिल कांग्रेस के ऊपरी सदन सीनेट में जाएगा। वहां इसके पास होने के लिए 60 वोटों की जरूरत होगी। जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास सिर्फ 50 वोट हैं। इसलिए वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के एक आकलन में कहा गया ये बिल पास नहीं पाएगा। इस तरह इसमें शामिल प्रावधान महज डेमोक्रेटिक पार्टी के राजनीतिक संदेश का हिस्सा बन कर रह जाएंगे।
टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि रिपब्लिकन पार्टी इस सवाल को संघ बनाम राज्यों के अधिकार का मुद्दा भी बनाएगी। हाउस में कई रिपब्लिकन सदस्यों ने चुनाव प्रचार में खर्च को सीमित करने संबंधी प्रस्ताव के आधार पर प्रस्तावित कानून को अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ भी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अपने फायदे के लिए ये बिल लेकर आई है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अपने शासन वाले राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी ने भी अपने फायदे के हिसाब से बिल पारित किए हैं।
अमेरिका में चुनाव नियम हमेशा से विवादित रहे हैं। चुनाव क्षेत्र की सीमाएं तय करने का अधिकार यहां राज्यों की विधायिका को है। इस कारण सत्ताधारी दल हर चुनाव में अपने हिसाब से चुनाव क्षेत्रों को तय करते हैं। इसके अलावा रिपब्लिकन पार्टी पर आरोप है कि वह अपने शासन वाले राज्यों में ऐसे नियम लागू करती है, जिससे ब्लैक और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों के लिए मतदान करना मुश्किल हो जाता है। इसका फायदा उसे मिलता है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने ताजा बिल से इस असंतुलन को दूर करने की कोशिश की है। लेकिन इसमें उसे सफलता मिलने की संभावना फिलहाल नहीं है।