तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने सीरिया में कुर्द आतंकियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि धमकियों के बाद भी तुर्की उत्तरी सीरिया में कुर्द आतंकियों के खिलाफ अपने अभियानों पर रोक नहीं लगाने वाला है।
राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने शुक्रवार को कहा कि तुर्की द्वारा उत्तरी सीरिया में कुर्द आतंकवादियों के खिलाफ अपने अभियान को नहीं रोकेगा। उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि यह कार्रवाई दूसरे देशों के लिए खतरा है।
एर्दोगन ने इस्तांबुल में दिए भाषण में कहा कि लोग कुछ भी कह सकते हैं, पर हम इस कदम को नहीं रोकेंगे जो हमने उठाया है। उन्होंने कहा कि अब हमें इस कार्रवाई को रोकने के लिए कहते हुए चारों ओर से खतरे आ रहे हैं।
एर्दोगन ने आगे कहा कि हम पीछे नहीं हटेंगे। हम इस लड़ाई को तब तक जारी रखेंगे जब तक कि सभी आतंकवादी हमारी सीमा से दक्षिण में 32 किलोमीटर की दूरी तक नहीं चले जाते हैं, जिस बात जिक्र खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने किया था।
तुर्की ने बुधवार को उत्तरी सीरिया में कुर्दिश पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स के खिलाफ एक अभियान शुरू किया। जिसे तुर्की ने एक आतंकवाद निरोधी अभियान बताया था।
तुर्की ने इसका उद्देश्य कुर्दिश पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स को अपनी सीमा से दूर रखने के लिए एक बफर जोन स्थापित करना बताया है। यह एक ऐसा विचार है जो पहली बार सार्वजनिक रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में बताया गया था।
हालांकि, ट्रंप और अन्य पश्चिमी सहयोगियों ने तुर्की द्वारा इस सप्ताह की गई कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है, क्योंकि तुर्की ने वाईपीजी को हाल के वर्षों में इस्लामिक स्टेट समूह से लड़ने में इस्तेमाल किया था।
वहीं, भारत ने गुरुवार को कहा था कि वह उत्तर-पूर्व सीरिया में तुर्की के एकतरफा सैन्य हमले पर बहुत चिंतित है। भारत ने कहा कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में अस्थिरता फैलने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई भी कमजोर हो सकती है।
विदेश मंत्रालय ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उत्तर-पूर्व सीरिया में तुर्की के एकतरफा सैन्य हमले पर हमें गहरी चिंता है। मंत्रालय ने कहा था कि हम तुर्की से संयम बरतने और सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का आह्वान करते हैं। हम बातचीत और चर्चा के जरिए सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का आग्रह करते हैं।