ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कुछ छूट देने के हाल के अमेरिकी फैसले से ईरान परमाणु समझौते के पुनर्जीवित होने को लेकर नई उम्मीद जगी है। अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन के इस फैसले का ईरान ने स्वागत किया है। अमेरिका के इस एलान के बाद वियना में समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए चल रही वार्ता का नया दौर शुरू करने पर सहमति बनी। ईरान के अलावा अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और चीन के प्रतिनिधि इस वार्ता का हिस्सा हैं। ये वार्ता बीते साल अप्रैल में शुरू हुई थी, लेकिन अब तक किसी ठोस मुकाम तक नहीं पहुंच सकी है।
ईरान की मांग रही है कि ट्रंप के कार्यकाल में उस पर लगाए गए तमाम प्रतिबंधों को अमेरिका हटा ले। बाइडन प्रशासन ने पहली बार इस हफ्ते इस दिशा में एक पहल की है। ये समझौता ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) नाम से हुआ था। लेकिन अमेरिका के इससे हटने का नतीजा हुआ कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की नई कोशिशें शुरू कर दीं। बताया जाता है कि वह यूरेनियम के 60 फीसदी तक संवर्धन की क्षमता हासिल कर चुका है। यानी वह परमाणु बम बनाने की क्षमता से कुछ ही पीछे है।
विश्लेषकों का कहना है कि वियना वार्ता तभी सफल हो सकती है, अगर इससे जुड़े सभी पक्ष समझौते के प्रति यथार्थवादी नजरिया अपनाएं। तेहरान स्थित विदेश नीति विश्लेषक दियको हुसैनी ने टीवी चैनल अल-जजीरा से कहा- ‘मेरी राय में अभी शुरू हुआ दौर संभवतया वार्ता का अंतिम दौर साबित होगा। अभी हम जो अनुमान लगा पा रहे हैं, वो यह है कि वार्ता के सफल होने की संभावना अधिक है। इस राह में तभी रुकावट आएगी, अगर कोई पक्ष जरूरत से ज्यादा रियायत हासिल करने की कोशिश करेगा।’
वियना वार्ता में अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि रॉबर्ट मैले ने यह स्वीकार किया है कि पुनर्जीवित समझौते से ईरान को परमाणु अप्रसार के उस स्तर पर रोकना संभव नहीं होगा, जहां उसे रखने का प्रावधान आरंभ में किया गया था। लेकिन उन्होंने कहा- ‘फिर भी यह समझौता करने योग्य है। अभी भी बहुत कुछ बचाया जा सकता है।’