रूस में धुर-दक्षिणपंथी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की लोकप्रियता में भारी उछाल आया है। ताजा जनमत सर्वक्षणों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि ये पार्टी इस साल होने वाले संसदीय चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बन कर उभर सकती है। पिछले दो दशक से रूस में मुख्य विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी रही है। ताजा सर्वे के मुताबिक फिलहाल राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया को 42 फीसदी लोगों का समर्थन हासिल है। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन का स्तर 19 फीसदी तक पहुंच गया है, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ रशियन फेडरेशन का समर्थन घट कर 15 फीसदी रह गया है।
रूस में अगले सितंबर में संसदीय चुनाव होंगे। इसके पहले सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी के संबंध और बिगड़ गए हैं। माना जा रहा है कि इसका फायदा भी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को मिलेगा। यूनाइटेड रशिया और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच बढ़ती खाई का संकेत चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के मुद्दे पर देखने को मिला है। रूस का चुनाव आयोग सितंबर में होने वाले चुनाव की निगरानी के लिए हजारों पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर रहा है। ऐसी खबर है कि सत्ताधारी दल के विरोध के कारण कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को पर्यवेक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।
मास्को के अखबार वेदोमोस्ती में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सत्ताधारी दल ने चुनाव आयोग से कहा है कि पर्यवेक्षक नियुक्ति के मामले में कम्युनिस्ट पार्टी को दूर रखा जाए। गौरतलब है कि हाल में कम्युनिस्ट पार्टी ने क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय) की आलोचना तेज कर दी है। उसने पिछले साल जुलाई में हुए संवैधानिक जनमत संग्रह में अपनाई गई प्रक्रिया की भी खुल कर आलोचना की थी। तब कम्युनिस्ट पार्टी के नेता गेन्नादी ज्यूगानोव ने कहा था कि ये जनमत संग्रह बिना पूरे नियम बनाए कराए गए हैं। सितंबर में ही हुए कई राज्यों के गवर्नरों के चुनाव के नतीजों को स्वीकार करने से भी कम्युनिस्ट पार्टी ने इनकार कर दिया था। तब से यूनाइटेड रशिया पार्टी से उसका टकराव बढ़ता गया है।
फरवरी में चुनाव आयोग की प्रमुख एला पामफिलोवा ने राजनीति-शास्त्रियों के एक सम्मेलन में कहा था कि आयोग ने चुनाव को जितना संभव है, उतना पारदर्शी बनाने की कोशिश की है। उन्होंने राजनीतिक दलों से कहा था कि वे खुद चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करें और इसके लिए अपने पर्यवेक्षक भेजें। लेकिन अखबार वेदोमोस्ती में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पर्यवेक्षकों की ट्रेनिंग के लिए नियुक्त प्रशिक्षकों को यह निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे किसी व्यक्ति को ट्रेनिंग सेशन में शामिल ना करें, जिसका संबंध कम्युनिस्ट पार्टी से हो। इसका मतलब यह होगा कि कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े किसी व्यक्ति को पर्येवक्षक नहीं बनाया जाएगा। अखबार के मुताबिक उदारपंथी पार्टी याबलोको से जुड़े लोगों को भी ट्रेनिंग सत्रों से बाहर रखने को कहा गया है।
कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी के सदस्य सर्गेई ओबुखोव ने कहा है कि उनकी पार्टी इस प्रक्रिया में भाग लेने को उत्सुक भी नहीं है। उन्होंने कहा कि आयोग को जरूरत सिर्फ ऐसे सरकार समर्थक पर्यवेक्षकों की है, जो यूनाइटेड रशिया पार्टी की भारी जीत पर मुहर लगाएं और उसे वैधता प्रदान करें। उन्होंने कहा- ‘अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यूनाइटेड रशिया पार्टी को सितंबर में होने वाले चुनाव में दो तिहाई बहुमत नहीं मिल पाएगा। वे इसके लिए उपाय कर रहे हैं। लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी इस तरह वैधता प्रदान करने के किसी प्रयास में शामिल नहीं होगी।’