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रियलिटी चेक: शादी या लिव-इन, कौन सी ज़िंदगी है बेहतर?

Sun, 16 Jul 2017 03:20 PM IST
बीबीसी हिन्दी
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लिव-इन
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दुनिया भर में लिव-इन में रहने का चलन पिछले कुछ दशकों में देखने को मिला है। लिव-इन वो रिश्ता है जिसमें दो एडल्ट एक दूसरे के साथ शादी किए बिना साथ रहते हैं। इस चलन के साथ दुनिया भर में शादी से इसकी तुलना भी शुरू हो गई। शादी बेहतर है या लिव-इन। इसको लेकर अलग अलग समाज के लोगों के बीच अध्ययन भी हो रहे हैं। ऐसा एक रियलिटी चेक ब्रिटिश समाज को लेकर भी सामने आया है। हालांकि ये अध्ययन केवल ब्रिटिश समाज का है। पर इससे एक झलक तो रिश्तों के ताने बाने की मिलती है।
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इंग्लैंड और वेल्स के नेशनल स्टैटिक्स ऑफिस (ONS) के आंकड़ों के मुताबिक कुछ ही कपल तलाक़ ले रहे हैं। क्या ये जश्न का कारण हो सकता है? इन आंकड़ों के मुताबिक 2015 में इंग्लैंड और वेल्स में 101,055 कपल ने तलाक लिया। इसके पहले साल के आंकड़ों के मुक़ाबले यह 9.1 फ़ीसदी कम था और 2003 में जब ऐसे मामले ज़्यादा बढ़े थे। उससे 34 फ़ीसदी कम था। 2015 के आंकड़े बताते हैं कि महिला और पुरुष दोनों में तलाक़ की दर 9.3 से गिरकर 8.5 पर आ गई।

शादी के आंकड़े

बीते 45 सालों से अपोजिट सेक्स के पार्टनर से शादी करने वालों लोगों की संख्या में भी कमी आई है। 2014 में 247,372 जोड़ों ने इंग्लैंड और वेल्स में शादी की। यह आंकड़ा 2013 के मुक़ाबले थोड़ा ज़्यादा था। 2013 में सबसे कम शादियां होने का रिकॉर्ड है। ओएनएस का मानना है कि ऐसा इसलिए भी हो सकता है कि लोगों ने 13 की अशुभ गिनती की वजह से शादी टाल दी हो। हालांकि शादियों का ट्रेंड ऐसा रहा है कि 1972 में रिकॉर्ड 426,000 शादियां हुईं।
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लिव-इन में रहने का चलन

जिस वक़्त में शादियां ज़्यादा स्थायी हैं, तब लोग कम शादी कर रहे हैं। यह गिरावट इसलिए भी हो रही है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अकेले रहना पसंद कर रहे हैं या फिर बिना शादी किए साथ रह रहे हैं। यह ऐसा वक़्त है। जब दो लोगों के बीच शारीरिक संबंधों के मुक़ाबले लिव-इन में रहना शर्मनाक माना जाता है। हालांकि लिव-इन में रहने वालों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। ओएनएस की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक़ इंग्लैंड और वेल्स की 9.8 फ़ीसदी आबादी 2016 में साथ में रहती थी। 2002 के यह आंकड़ा 6.8 फ़ीसदी था।

अब तक ये आंकड़ा नहीं मिला है कि साथ रहने वालों में से कितने जोड़े अलग हो रहे हैं और शादीशुदा जोड़ों के मुक़ाबले वो कितने ख़ुश रहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो क्या जो लोग लिव-इन में रहते हैं वो शादीशुदा लोगों की तुलना में जल्दी रिश्ता खत्म करते हैं।

इस सवाल के जवाब के लिए मिलेनियम कोहॉर्ट स्टडी मददगार हो सकती है। जिसमें 2000 से 2001 के बीच यूके में जन्मे 19000 बच्चों की ज़िंदगी को परखा गया। इस डाटा पर की गई स्टडी के मुताबिक 9 फ़ीसदी कपल जो बच्चे के पैदा होने के वक़्त साथ थे। उसके पांच साल का होने तक वे लोग अलग हो चुके थे। जबकि इसी दौरान लिव-इन में रहने वाले 27 फ़ीसदी कपल अलग हुए।
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लिव-इन
इससे यह साफ़ होता है कि शादीशुदा लोगों के मुक़ाबले लिव-इन में रहने वाले कपल जिनके बच्चे भी हैं, जल्दी अलग होते हैं। मैरिज फाउंडेशन के हैरी बेनसन और यूनिवर्सिटी ऑफ लिंकन के प्रो. स्टीफेन मैक्केय ने यूके के 40000 घरों पर किए गए सर्वे में एक और डाटा सामने लाया।


उन्होंने पाया कि बच्चे के पैदा होने से पहले जो लोग शादीशुदा थे। 2009-10 में जब बच्चे 14 या 15 साल के थे तब उनके अलग होने का आंकड़ा 24 फीसदी था। लेकिन जो लोग बच्चे के पैदा होने के समय शादीशुदा नहीं थे। उनके अलग होने का आंकड़ा 69 फीसदी था।


हालांकि सभी स्टडी में सिर्फ उन्हीं लिव-इन पार्टनर के आंकड़े मिले हैं जिनके बच्चे हैं। जो कपल साथ रहे हैं लेकिन उनके बच्चे नहीं है। उनका आंकड़ा नहीं है। जब तक लिव-इन में रहने वालों का स्पष्ट डाटा नहीं मिल जाता। तब तक यह कह पाना मुश्किल है। कि कितने कपल साथ रहना जारी रखते हैं। हालांकि तलाक़ के मामलों में आ रही कमी इस बात की तरफ इशारा कर रही है ।कि शादी में भी स्थायित्व आ रहा है।
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