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दुर्लभ तारा: चमकते-चमकते हो जाता है गायब, धरती से 25 हजार प्रकाश वर्ष दूर

Mon, 14 Jun 2021 06:18 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला रिसर्च टीम, वाशिंगटन

सार

  • आकाशगंगा के केंद्र में है ‘वीवीवी-डब्ल्यूआईटी-08’, धरती से 25 हजार प्रकाश वर्ष दूर और सूर्य से सौ गुना बड़े
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
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खगोल वैज्ञानिकों को आकाशगंगा के केंद्र के पास एक टिमटिमाता हुआ विशाल तारा मिला है, जो धरती से 25 हजार प्रकाश वर्ष से भी ज्यादा दूरी पर है। वीवीवी-डब्ल्यूआईटी-08 नाम के इस तारे पर वैज्ञानिकों ने काफी समय से नजर बना रखी थी। उनका कहना है, यह चमकते-चमकते इतना मंद पड़ जाता है कि लगभग गायब हो जाता है।

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शोध कर रहे खगोलविदों के मुताबिक, किसी तारे की चमक बदलना बहुत असामान्य है। हालांकि, कुछ तारे स्पंदित होते रहते हैं, तो किसी को दूसरा तारा ढंक देता है। लेकिन इस तारे का फीका पड़ना और चमकना दुर्लभ है।

ज्यादा पड़ताल की जरूरत
शोध के सहलेखक और एडिनवर्ग यूनिवर्सिटी के सर्जेई कोपोसोव का कहना है कि धरती और दूर स्थित इस तारे के बीच एक अंधेरी, बड़ी और लंबी वस्तु को गुजरते देखना काफी अद्भुत है। हालांकि, इसकी उत्पत्ति को लेकर हम केवल अनुमान लगा सकते हैं। मंद पड़ने और चमकने वाले इस तारे के अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं का कहना है कि टिमटिमाने वाले विशाल तारे अस्तित्व में हैं, जिनकी ज्यादा पड़ताल की जानी चाहिए।
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सूर्य से सौ गुना बड़े

  • अनुमान: अनदेखा साथी ढंक देता होगा
  • रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों का मानना है कि वीवीवी-डब्ल्यूआईटी-08 का ताल्लुक एक अलग वर्ग ‘ब्लिकिंग जाएंट’ बाइनरी स्टार सिस्टम से हो सकता है। 
  • इस वर्ग में सूर्य से भी सौ गुना बड़े तारे होते हैं, जिन्हे कुछ दशकों के अंतराल में कोई अनदेखा साथी (ग्रह या तारा) ढंक देता है। किसी गोलाकार पदार्थ से घिरा होने के कारण यह साथी तारे को ढंकता होगा। इसके चलते विशाल तारा टिमटिमाने लगता है।
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