अमेरिका में सैकड़ों शिक्षण संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और कंपनियों का निजी डाटा चोरी करके सार्वजनिक करने का मामला सामने आया है। कई पीड़ितों से उनका डाटा सार्वजनिक न करने की एवज में पैसा मांगा जा रहा है।
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों व स्टाफ को इस बारे में चेतावनी दी है और आशंका जताई कि किसी रेनसमवेयर ग्रुप ने यह साइबर अपराध अंजाम दिया है। इसके लिए एसिलियन नामक कंपनी को निशाना बनाया गया, जो डिजिटल फाइलों को एक से दूसरी जगह सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की सेवा देने का दावा करती है।
विश्वविद्यालय के मुताबिक, कई लोगों के चोरी हुए डाटा के स्क्रीन शॉट ऑनलाइन पोस्ट किए जा रहे हैं। हैकर धमकियां देकर पैसा भी मांग रहे हैं। स्क्रीन शॉट में विद्यार्थियों और कर्मचारियों के सोशल सिक्युरिटी नंबर, बैंक खाते शामिल हैं। यह डाटा दिसंबर व जनवरी में 20 साल पुरानी एसिलियन कंपनी के पास से चुराया गया। अनुमान है कि 300 संस्थानों से डाटा चोरी हुआ है।
इनके यहां चोरी की पुष्टि : लाखों हो सकते हैं पीड़ित
- स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के तहत आने वाला चिकित्सा संस्थान व न्यूयॉर्क सिटी का येशिवा विश्वविद्यालय पीड़ितों में शामिल हैं
- मैरिलैंड विश्वविद्यालय बाल्टिमोर के विद्यार्थियों का डाटा दिसंबर में चुराकर बीते रविवार को क्लोप नामक हैकर्स ने पोस्ट किया
- कोलाराडो और मायामी विश्वविद्यालयों ने भी जानकारी दी है कि उनका डाटा जनवरी में चुराया गया, जिसमें निजी, स्वास्थ्य व शोध से संबंधित फाइलें शामिल
- वॉशिंगटन राज्य ऑडिटर ऑफिस के अनुसार 15 लाख बेरोजगारों के आवेदनों में दी गई सूचनाएं मार्च में चोरी हुई
तीन वर्ष से तेजी से बढ़े मामले
अमेरिका में रेनसमवेयर साइबर हमले तीन वर्ष में तेजी से बढ़े हैं। अधिकतर घटनाएं रूसी बोलने वाले हैकर गैंग अंजाम दे रहे हैं। डाटा सार्वजनिक न करने की एवज में बड़ी राशि मांगी जाती है। फिरौती वसूली की तरह है, इसी से इसे रेनसमवेयर नाम मिला है।
तीन गुना हुई वसूली की रकम
कई मामलों में फिरौती की रकम चुकाई भी जा रही है। 2019 में औसतन 85 लाख रुपये फिरौती के तौर पर हैकर्स को दिए गए। यह रकम 2020 में 3.29 लाख पहुंच चुकी है, यानी तीन गुना। विशेषज्ञों के अनुसार अपने डाटा को बचाने या वापस पाने के लिए कुछ कंपनियां 2020 में 7.73 करोड़ रुपये तक दे चुकी हैं।