नेपाल के जनकपुर और बिहार के जयनगर के बीच रेल सेवा मार्च के पहले हफ्ते से शुरू हो जाएगी। इसके लिए चेन्नई रेल कोच फैक्ट्री से फरवरी के पहले हफ्ते में रेल कोच की पहली खेप जनकपुर पहुंच जाएगी और उसके बाद ट्रेन का ट्रायल रन शुरू हो जाएगा। यह जानकारी रेल विभाग के महानिदेशक बलराम मिश्रा ने दी।
नेपाल के रेल विभाग के मुताबिक इस रूट पर व्यावसायिक तौर पर ट्रेनों की आवाजाही मार्च के पहले हफ्ते में शुरू होगी। चेन्नई से जनकपुर के लिए पांच तैयार कोच बुधवार को रवाना किए जा रहे हैं जो करीब 15 दिनों में जनकपुर पहुंच जाएंगे।
जनकपुर-जयनगर के बीच रेलवे ट्रैक 85 साल पहले अंग्रेजों ने बनवाई थी। इस रास्ते से अंग्रेज नेपाल के मतोहारी के जंगलों से लकड़ी भारत लाया करते थे। पहले यह 52 किलोमीटर लंबी रेल लाइन मतोहारी के बिजुलपुरा से बिहार के जयनगर के बीच थी। पिछले पांच साल से इस रास्ते से रेल यातायात को बंद कर दिया गया था और इस रूट का आधुनिकीकरण करके अब यहां से डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने की शुरुआत होने जा रही है।
इसके लिए मई 2018 में नेपाल और भारत के बीच इस रूट पर दो सेट ट्रेन को लेकर करार हुआ। भारत सरकार के सहयोग से जयनगर-जनकपुर-बारदीबास के बीच 69 किलोमीटर का यह रूट तीन चरणों में पूरा हुआ है। इनमें से 3 किलोमीटर की दूरी भारत में आती है। पहले चरण में जयनगर से कुरथा, दूसरे में कुरथा से भंगाहा और तीसरे चरण में भंगाहा से बारदीबास तक का काम पूरा हुआ। इसमें करीब 10 करोड़ रुपये की लागत आई। पिछले साल अक्टूबर में भारत से एक मालगाड़ी को प्रयोग के तौर पर सफलता से जनकपुर भेजा भी गया था।
पहले फेज में जयनगर से जनकपुर के बीच 35 किलोमीटर तक ट्रेन चलाई जाएगी। रेल अधिकारियों के मुताबिक एक बार में करीब एक हजार यात्री सफर कर पाएंगे और ट्रेन की रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। चेन्नई से कोच और इंजन खरीदने में नेपाल को 85 करोड़ रुपए का खर्च आया है।