ऑस्ट्रेलिया में बनी लेबर पार्टी की सरकार के रुख पर पश्चिमी देशों और चीन दोनों की नजर टिकी हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के कार्यकाल में ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंध काफी बिगड़ गए थे। रविवार शाम तक यह साफ हो गया कि इस बार ऑस्ट्रेलिया में स्पष्ट बहुमत के साथ एंथनी अल्बानीज के नेतृत्व में लेबर पार्टी की सरकार बनेगी। लेबर पार्टी ने इसके पहले ही एलान कर दिया कि नए प्रधानमंत्री अपने पहले कार्यक्रम के रूप में क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड) की शिखर बैठक में भाग लेने के लिए टोक्यो जाएंगे।
प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद अल्बानीज के जापान रवाना होने के निर्णय की अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन तारीफ की है। विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अल्बानीज के शासनकाल में भी ऑस्ट्रेलिया यूक्रेन युद्ध और चीन के मामले में अमेरिकी रणनीति के साथ उतनी ही निकटता से जुड़ा रहे, जितना मॉरिसन के समय था।
पर्यवेक्षकों की निगाहें इस ओर टिकी हैं कि ऑस्ट्रेलिया में नई सरकार बनने और नए प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं को लेकर चीन क्या रुख अपनाता है। इस बीच यह साफ है कि मॉरिसन की हार से चीन में खुशी महसूस की गई है। चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स के टीकाकार हु शिजिन ने कहा है- मॉरिसन सरकार ने चीन के नजरिए से कई बुरे काम किए। लेबर सरकार की चीन नीति भी संभवतः बहुत बेहतर नहीं होगी। लेकिन मॉरिसन और उनके साथियों की हार खुशी की बात है।
चुनाव से पहले अल्बानीज ने कहा था कि प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल की शुरुआत टोक्यो में क्वाड की बैठक में भाग लेकर करेंगे। उसके बाद वे जकार्ता जाना चाहेंगे। उन्होंने राय जताई थी- ‘इंडोनेशिया दुनिया की एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित होगा। हम ऐसे क्षेत्र में रहते हैं, जहां भविष्य में हमारे सामने चीन, भारत और इंडोनेशिया बड़ी ताकत के रूप में मौजूद होंगे। हमें उनसे आर्थिक भागीदारी मजबूत करनी होगी।’
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पश्चिमी और चीनी विशेषज्ञों की निगाहें टोक्यो में अल्बानीज की भूमिका और उनके रुख पर टिकी होंगी। उसके बाद ही दोनों जगहों पर नई ऑस्ट्रेलियाई सरकार के बारे में ठोस राय बनेगी।