राष्ट्रपति जो बाइडन के अचानक अपनी एशिया-प्रशांत क्षेत्र की यात्रा के कार्यक्रम में कटौती करने को फैसले को अमेरिकी कूटनीति के लिए एक जोरदार झटका समझा जा रहा है। अमेरिका में कर्ज सीमा को लेकर चल रहे विवाद के कारण राष्ट्रपति को यह कदम उठाना पड़ा। इसके कारण ऑस्ट्रेलिया में होने वाली क्वाड्रैंगुलर सिक्युरिटी डायलॉग (क्वैड) की शिखर बैठक को रद्द करना पड़ा है। साथ ही इससे बाइडन की बहुचर्चित पापुआ न्यू गिनी की यात्रा भी रद्द हो गई है।
बाइडन ने मंगलवार रात यह एलान किया कि उन्हें अपनी एशिया-प्रशांत क्षेत्र की यात्रा में कटौती करनी पड़ रही है। इसके बाद बुधवार सुबह ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने पुष्टि कर दी कि सिडनी में होने वाली क्वैड बैठक रद्द हो गई है। इसके कुछ देर पहले तक अल्बानीज ने उम्मीद जताई थी कि बाइडन के न आने के बावजूद भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के प्रधानमंत्री क्वैड शिखर बैठक में शामिल होंगे। लेकिन कुछ ही घंटों में उन्हें इसके विपरीत घोषणा करनी पड़ी।
अब यह संभावना जताई गई है कि जापान के हिरोशिमा में होने जा रहे जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ही क्वैड के सदस्य देशों के नेता अलग समय निकाल कर बातचीत करेंगे। बाइडन ने एलान किया है कि वे बुधवार को वॉशिंगटन से हिरोशिमा के लिए रवाना होंगे और रविवार को अमेरिका लौट आएंगे।
विश्लेषकों के मुताबिक जिस समय अमेरिका की सामरिक नीति में एशिया-प्रशांत केंद्रीय स्थान दिया गया है, घरेलू मजबूरी के कारण दो महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों को रद्द करना बाइडन प्रशासन के लिए एक करारा झटका है। आशंका है कि इससे अमेरिकी प्राथमिकता को लेकर भरोसे का संकट बढ़ सकता है। अमेरिका ने बाइडन की इस यात्रा को हाई प्रोफाइल बनाने के लिए जी-7 शिखर बैठक और पापुआ न्यू गिनी में उनके कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अपने सहयोगी कई देशों के नेताओं को आमंत्रित किया था। प्रधानमंत्री मोदी उसके बाद क्वैड की बैठक में जाते। लेकिन अब उन्हें और अन्य नेताओं को जी-7 शिखर बैठक के बाद अपने देश लौटना होगा।
बाइडन ने पापुआ न्यू गिनी में प्रशांत महासागर में स्थित द्वीप देशों के शिखर सम्मेलन को संबोधित करने की योजना बनाई थी। यह किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की पापुआ न्यू गिनी की पहली यात्रा होती। इस क्षेत्र में हाल के वर्षों में चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। बाइडन का मकसद उन द्वीपों की तरफ दोस्ती और सहायता का हाथ बढ़ा कर चीन के प्रभाव को नियंत्रित करना था।
जो बाइडन ने पिछले साल कहा था कि वे प्रशांत क्षेत्र में स्थित द्वीपों में दिखी कूटनीतिक दिशा को बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब घरेलू तकाजे के कारण उन्होंने अचानक इन देशों के नेताओं से मिलने का कार्यक्रम रद्द कर दिया है। विश्लेषकों के मुताबिक इससे अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने लिए सद्भावना पैदा करने की जो कोशिशें की हैं, उनका असर सीमित हो जा सकता है।
अमेरिका का कर्ज सीमा संकट नाजुक मोड़ पर पहुंचता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अगर इसी महीने कांग्रेस कर्ज सीमा बढ़ाने पर राजी नहीं हुई, तो अमेरिका के लिए ऋण डिफॉल्ट करने तक की नौबत आ सकती है।