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US: 'क्वाड का मकसद साझा चुनौतियों का समाधान खोजना, सिद्धांतों के लिए खड़ा होना', अमेरिकी राजदूत गार्सेटी बोले

Tue, 24 Sep 2024 01:12 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क।

सार

US: अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा कि क्वाड एक सैन्य संगठन नहीं है। बल्कि इसका उद्देश्य शांति बनाए रखना है। उन्होंने कहा, इसमें कोई शक नहीं है कि सुरक्षा और शांति हमारे देशों और हमारे सभी लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं।
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एरिक गार्सेटी - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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अमेरिका के भारत में राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा कि चारों क्वाड देशों का एक समान दृष्टिकोण है कि हिंद प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र और समृद्ध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समूह का उद्देश्य साझा चुनौतियों का समाधान खोजना और उन सिद्धांतों के लिए खड़े होना है, जिन्हें सभी देश साझा नहीं करते हैं। 

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समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक इंटरव्यू में गार्सेटी ने कहा कि क्वाड एक ऐसा ताकतवर मंच हैं, जहां हम दृष्टिकोण साझा कर सकते हैं और समाधान निकाले जा सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने गृहनगर विलमिंगटन (डेलावेयर) में क्वाड शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भाग लिया। 
  
गार्सेटी ने कहा, क्वाड का उद्देश्य चारों देशों के साझा दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। सम्मेलन के अंत में जारी संयुक्त घोषणा (ज्वाइंट डिक्लेरेशन) में आपदा सहायता और आपूर्ति श्रृखलाओं जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया है।
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्वाड किसी एक देश के बारे में नहीं है, बल्कि यह चार देशों का एक साझा दृष्टिकोण है। यह इस साझा दृष्टिकोण के बारे में है कि एक स्वतंत्र, खुला और समृद्ध हिंद प्रशांत क्षेत्र होना चाहिए। अगर आप घोषणा को देखें, तो यह स्वास्थ्य देखभाल, सुरक्षा में सहयोग और संकट के समय हमारे तटरक्षक बलों को एक साथ काम करने के बारे में है, ताकि हम अपने लोगों को सुरक्षित रख सकें। इसके अलावा, यह आर्थिक विकास पर भी फोकस करता है, जैसे कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना, ताकि कोई एक देश महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को बाधित न कर सके। किसी को भी क्वाड से खतरा महसूस नहीं करना चाहिए। 

गार्सेटी ने कहा कि क्वाड एक सैन्य संगठन नहीं है। बल्कि इसका उद्देश्य शांति बनाए रखना है। उन्होंने कहा, इसमें कोई शक नहीं है कि सुरक्षा और शांति हमारे देशों और हमारे सभी लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं। चाहे वह तटरक्षक बलों के एकीकरण की नई घोषणा हो, जिसमें हमारे चालक दल के सदस्य एख साथ काम करेंगे, या हमारे कुछ सैन्य विमानों के लिए लिए एक केंद्र बनाने की बात हो, ताकि वे एक-दूसरे के देशों के साथ मिलकर काम कर सकें, इन सभी का उद्देश्य हमारे लोगों की सुरक्षा है। 

'भारत को मित्र और साझेदार के रूप में देखता है अमेरिका'
भारत-अमेरिका संबंधों पर गार्सेटी ने कहा कि अमेरिका, भारत को एक मित्र और साझेदार के रूप में देखता है, न कि किसी अन्य देश के खिलाफ संतुलन बनाने के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश सीमा, संप्रभुता और कानून के शासन के बारे में समान सिद्धांत साझा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी सीमा पर विवाद पैदा हुआ है, तब अमेरिका ने भारत के साथ खड़े होकर उसका समर्थन किया है। 

अमेरिकी राजदूत ने कहा, हम भारत को एक मित्र और साझेदार के रूप में देखते हैं, न कि किसी के खिलाफ संतुलन बनाने के लिए। हम सीमाओं, संप्रभुता और कानून के शानस के बारे में समान सिद्धांत साझा करते हैं। जब सीमा पर संघर्ष होते हैं, तो हम भारत के साथ खड़े होते हैं। हमने 1952 से मैकमोहन रेखा को मान्यता दी है। हमारा मानना है कि दुनिया में कहीं भी आक्रामकता को समर्थन नहीं मिलना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि अमेरिका-चीन संबंध काफी तनावपूर्ण हैं और क्षेत्र में भारत-चीन संबंध भी अच्छे नहीं हैं, तो उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि करीब 75 फीसदी सीमा विवादों का निपटारा हो चुका है। लेकिन कोई भी तब तक आगे नहीं बढ़ना चाहेगा, जब तक उसकी संप्रभुता खतरे में हो। 

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