रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को संसद में एक विधेयक पेश कर अमेरिका के साथ परमाणु हथियार संधि को पांच साल के लिए बढ़ाया। रूस की अमेरिका के साथ परमाणु हथियार से संबंधित ‘न्यू स्टार्ट’ संधि अगले सप्ताह समाप्त होने वाली थी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ हुई टेलीफोन वार्ता के बाद ड्यूमा ने हथियारों को कम करने वाली इस संधि को बढ़ाने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया।
‘न्यू स्टार्ट’ समझौता अमेरिका और रूस के बीच अब कायम एकमात्र समझौता है। यह समझौता रूस के परमाणु बलों पर लगाम लगाने वाला और दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्थिरता के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है। ‘न्यू स्टार्ट’ संधि पर 2010 में हुई थी, जिसके तहत 1550 परमाणु हथियार मॉस्को और वाशिंगटन की ओर से तैनात किए जा सकते हैं। मॉस्को और वाशिंगटन दुनिया में सबसे अधिक परमाणु हथियार रखने वालों में शामिल हैं।
बता दें कि कुछ घंटे पूर्व ही बाइडन और पुतिन के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी जिसमें उन्होंने नई स्टार्ट संधि को आगे बढ़ाने के बारे में राजनयिक कोशिशों के प्रति संतोष जताया था। क्रेमलिन (रूसी संसद) के अनुसार वे अगले कुछ दिनों में आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए सहमत हुए। बाइडन ने रूस के राष्ट्रपति के साथ हथियारों को कम करने वाले अहम समझौते समेत कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।
व्हाइट हाउस ने बताया कि राष्ट्रपति बाइडन ने भी टेलीफोन पर हुई इस बातचीत की पुष्टि की। दोनों नेता इस पर सहमत हुए कि उनकी टीमें 5 फरवरी तक इस संधि को विस्तार देने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करें। दोनों नेताओं में इसके अलावा हथियार नियंत्रण से लेकर सुरक्षा से जुड़े तमाम मसलों पर चर्चा हुई। बाइडन ने इस दौरान जोर दिया कि अमेरिका यूक्रेन की संप्रभुता का मजबूती से समर्थन करता रहेगा।
कुछ मुद्दों पर गंभीर मतभेद भी दिखे
रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ हुई फोन वार्ता में जो बाइडन ने कुछ ऐसे भी मुद्दों को भी उठाया, जिनसे रूस असहज होता रहा है। उन्होंने रूस के विपक्षी नेता अलेस्की नवालनी को जहर दिए जाने और बाद में गिरफ्तार किए जाने, 2020 के अमेरिकी चुनाव में दखल, अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की हत्या पर कथित तौर पर रूस की तरफ से इनाम रखे जाने जैसे मुद्दों पर चिंता जताई। बाइडन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए मजबूत कार्रवाई करेगा। इन मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच गंभीर मतभेद दिखाई दिए।