नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) के प्रमुख पुष्प कमल दहल के बारे में हुए ताजा खुलासे ने नेपाल में राजनेताओं के दोमुंहेपन को लेकर लोगों ने गुस्सा नए सिरे से भड़का दिया है। दहल अपने सार्वजनिक बयानों में अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से आर्थिक मदद लेने का पुरजोर विरोध करते रहे हैँ। लेकिन अब नेपाली अखबार कांतिपुर दैनिक ने पिछले साल 29 सितंबर को लिखी गई एक चिट्ठी का खुलासा किया है। वह पत्र प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और दहल के दस्तखत से एमसीसी को भेजा गया था। पत्र में अमेरिकी संस्था से उसकी 50 करोड़ डॉलर की मदद स्वीकार करने के सवाल पर देश में आम सहमति बनाने के लिए चार-पांच महीने का समय देने का अनुरोध किया गया।
इस मसले पर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का दोमुंहापन पहले से चर्चित रहा है। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री रहते हुए ओली ने ये मदद स्वीकार करने की वकालत की थी। लेकिन सत्ता से हटने के बाद उन्होंने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया। अभी ओली, दहल, और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टियां इस मदद को लेने का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि ये मदद अमेरिका और चीन के बीच चल रही होड़ से जुड़ी हुई है। नेपाल को इस होड़ में नहीं पड़ना चाहिए।
बीते गुरुवार को दहल की करनाली प्रांत के नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक हुई थी। उसमें भी उन्होंने दोहराया कि एमसीसी करार का ‘उसके मौजूदा स्वरूप में’ अनुमोदन नहीं किया जाएगा। उधर प्रधानमंत्री देउबा इस करार का अनुमोदन कराने में एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। लेकिन इसका दहल की पार्टी की तरफ से जोरदार विरोध किया जा रहा है। देउबा के नेतृत्व वाले पांच दलों के सत्ताधारी गठबंधन में माओइस्ट सेंटर भी शामिल है। इसमें माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) भी शामिल है। वह भी एमसीसी समझौते का विरोध कर रही है।