पिछले महीने विधानसभा को भंग करने से रोकने के लिए पीएमएल-एन के पंजाब के गवर्नर बलीगुर रहमान ने सीएम परवेज इलाही से विश्वास मत मांगा था। जिसके बाद विपक्ष के भारी विरोध के बीच बुधवार रात को उन्होंने पंजाब विधानसभा में उन्होंने आवश्यक 186 वोट हासिल किए। इसके बाद आज उन्होंने विधानसभा भंग करने के लिए राज्यपाल को लिखा है।
पाकिस्तान के सियासी हलकों में गर्मी बनी हुई है। पूर्व पीएम इमरान खान देश में जल्द से जल्द आम चुनाव कराने पर अड़े हुए हैं। उन्होंने इस बारे में पहले ही एलान किया था कि उनकी पार्टी अपने बहुमत वाले दोनों राज्यों- पंजाब और खैबर पख्तूनवा की प्रांतीय असेंबलियों को भंग करवा देगी। इस घटनाक्रम में गुरुवार को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री चौधरी परवेज इलाही ने प्रांतीय विधानसभा भंग करने के लिए पत्र पर हस्ताक्षर किए। उनके पत्र को स्वीकृति के लिए राज्यपाल के पास भेज दिया गया है।
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गौरतलब है कि पंजाब प्रांत में अपदस्थ प्रधान मंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी और पीएमएल-क्यू की संयुक्त सरकार है। पंजाब प्रांत के सीएम परवेज इलाही ने यह कदम तब उठाया जब कुछ ही घंटो पहले विश्वास मत प्राप्त किया था। पंजाब प्रांत के सीएम परवेज इलाही ने राज्यपाल को संबोधित करते हुए लिखे गए पत्र में कहा है कि 'मैं, पंजाब का मुख्यमंत्री परवेज इलाही, आपको प्रांतीय विधानसभा को भंग करने की सलाह देता हूं।'
बता दें कि राज्यपाल को यह पत्र लिखने से पहले सीएम परवेज इलाही ने पूर्व पीएम इमरान खान के जमान पार्क स्थित आवास पर मुलाकात की थी। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद पूर्व सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने विधानसभा भंग के लिए राज्यपाल को लिखे गए पत्र के बारे में जानकारी दी। फवाद चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा भंग करने की सलाह पंजाब के राज्यपाल को भेजी है।
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फवाद चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान के नियमों के मुताबिक, अगर राज्यपाल उनकी सलाह नहीं मानते हैं, तो 48 घंटे के बाद विधानसभा स्वत: ही भंग हो जाएगी। इस दौरान उन्होंने सत्तापक्ष पर निशाना साधते हुए देश में आम चुनाव की मांग की। चौधरी ने कहा कि केंद्र में पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को मध्यावधि चुनाव की घोषणा करनी चाहिए क्योंकि चुनाव से बचने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
पिछले महीने विधानसभा को भंग करने से रोकने के लिए पीएमएल-एन के पंजाब के गवर्नर बलीगुर रहमान ने सीएम परवेज इलाही से विश्वास मत मांगा था। जिसके बाद विपक्ष के भारी विरोध के बीच पंजाब विधानसभा में उन्होंने आवश्यक 186 वोट हासिल किए।