पहलगाम में आतंकी हमले और उसके बाद भारत के पाकिस्तान के खिलाफ लिए गए एक्शन से पाकिस्तान घुटनों पर आ गया है। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने जहां पाकिस्तान को सैन्य मोर्चे पर तबाह कर दिया वहीं, उससे पहले सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के फैसले से पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसा दिया है। वहीं, अब पीटीआई के सीनेटर ने सिंधु जल संधि को बहाल करने की अपील की है। उन्होंने सीनेट में कहा कि सिंधु जल संधि का निलंबन 'वाटर बम' की तरह है।
पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत की ओर से सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने पर शुक्रवार को पाकिस्तान में विपक्ष के नेता ने सरकार से देश में अकाल से बचने के लिए संधि को जल्द से जल्द बहाल करने का आग्रह किया।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के सीनेटर अली जफर ने सीनेट से कहा कि पानी की कमी हम पर थोपा जा रहा युद्ध है। पानी को लेकर 21वीं सदी के युद्धों के बारे में भविष्यवाणियां सच साबित होने जा रही हैं। उन्होंने कहा, अगर हम अपने जल मुद्दों को हल नहीं करते हैं, तो हमें अकाल का सामना करना पड़ सकता है। सिंधु हमारी जीवन रेखा है। सिंधु जल संधि का निलंबन 'वाटर बम' की तरह है। यह हमारे ऊपर लटका हुआ, जिसे हमें जल्द से जल्द निष्क्रिय करना चाहिए। जफर ने दावा किया कि सिंधु जल समझौते को एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, अगर भारत इस समझौते को खत्म करना चाहता है, तो दोनों देशों को एक नए समझौते पर बातचीत करनी होगी। वे (भारतीय) इसे आसानी से रद्द नहीं कर सकते। जफर ने कहा, सिंधु जल संधि को निलंबित करके पाकिस्तान के पानी को रोकने के किसी भी प्रयास को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह हमने पहले ही बता दिया है।
पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने स्थगित किया था सिंधु जल समझौता
पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने 23 अप्रैल को सिंधु जल समझौते (1960) को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की घोषणा की। यह कदम पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के जवाब में उठाया गया था। दोनों देशों के बीच चार युद्धों और दशकों से जारी सीमा पार आतंकवाद के बावजूद इस संधि को बरकरार रखा गया था। सिंधु नदी के जल पर पाकिस्तान की 70 फीसदी कृषि निर्भर करती है। कई शहरों के लिए पेयजल की आपूर्ति भी इस नदी से की जाती है।
संघर्ष विराम के बाद भी समझौते पर स्थगन जारी
भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले संघर्ष के बाद बीती 10 तारीख को इस पर विराम लग गया था। पाकिस्तान की ओर से घुटने टेके जाने के बाद भारत ने 10 तारीख को शाम पांच बजे से संघर्ष विराम का एलान किया। तब विदेश मंत्रालय ने बताया था कि संघर्ष विराम के लिए भारत अपनी शर्तों पर तैयार हुआ है। संघर्ष विराम के बीच सिंधु जल संधि का निलंबन जारी रहेगा।
सिंधु जल समझौता
सिंधु जल समझौता, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता है। इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था। इस संधि के तहत, हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया है। पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारत को मिलता है जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया। समझौते के तहत भारत को लगभग 30 प्रतिशत और पाकिस्तान को 70 प्रतिशन पानी का हक मिला। इस समझौते में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि झेलम, चिनाब और सिंधु नदियों का पानी भारत को पाकिस्तान में जाने देना होगा।
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पाकिस्तान हो गया परेशान
सिंधु जल संधि को रोकने के भारत के कदम से पाकिस्तान परेशान हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान पहले से ही सूखे का संकट झेल रहा है। भारत की ओर पानी बंद कर देने से संकट और बढ़ गया। बीते दिनों पाकिस्तान के कानून और न्याय राज्य मंत्री अकील मलिक ने कहा था कि हम तीन अलग-अलग कानूनी विकल्पों की योजना पर काम कर रहे हैं। इस मामले को स्थायी मध्यस्थता न्यायालय या हेग में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और विश्व बैंक में ले जाने पर विचार किया जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान को तीनों जगह से राहत कम मिलने की उम्मीद है।
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