साल भर पहले देश की सत्ता में रही पाकिस्तान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ इन दिनों मुश्किलों में है। एक ओर जहां सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की राजनीतिक पार्टी पीटीआई को प्रतिबंधित संगठन घोषित करने के संकेत दिए हैं। वहीं, दूसरी ओर पाकिस्तानी पुलिस ने रविवार को इमरान खान और एक दर्जन से अधिक पार्टी नेताओं के खिलाफ आतंकवाद का मामला दर्ज किया है।
क्यों विवादों में है पीटीआई? पीटीआई को बैन क्यों किया जा सकता है? इसके नेताओं के खिलाफ आतंकवाद का मामला क्यों दर्ज हुआ? क्या पहले किसी पार्टी को बैन किया गया है? किसी भी राजनीतिक दल को बैन कैसे किया जा सकता है? इसके आधार क्या होते हैं? क्या बैन को अदालत में चुनौती दी जा सकती है? आइये जानते हैं...
इस्लामाबाद में पीटीआई समर्थक
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क्यों विवादों में है पीटीआई?
पड़ोसी देश पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी पीटीआई पर प्रतिबंध का खतरा मडराने लगा है। दरअसल, शनिवार को लाहौर में एक संवाददाता सम्मेलन में गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह ने कहा कि पीटीआई को प्रतिबंधित संगठन घोषित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। कार्रवाई के कारण की जानकारी देते हुए राणा ने कहा कि कानूनी टीम कई खुलासों के बाद इस मामले की जांच कर रही है। बयान के मुताबिक, जांच के बाद पार्टी के खिलाफ केस दर्ज किया जा सकता है। हालांकि, गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक दल को आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित करना अंततः अदालतों पर निर्भर करता है।
पीटीआई को बैन क्यों किया जा सकता है?
गृह मंत्री के अनुसार, पंजाब पुलिस ने अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ लाहौर में 'नो-गो एरिया' के खिलाफ एक ऑपरेशन चलाया, जहां एक राजनीतिक नेता ने भय का माहौल बनाया था। बता दें, पूर्व पीएम के आवास में 'नो-गो एरिया वह क्षेत्र है जहां किसी भी अधिकारी को घुसने की इजाजत नहीं थी। सनाउल्लाह ने कहा कि अदालती आदेशों के अनुपालन के दौरान विरोध का सामना करने के बाद कार्रवाई की गई, जिससे आतंकी संगठन की मौजूदगी के बारे में संभावना जताई गई।
पाकिस्तान पुलिस और पूर्व पीएम इमरान खान के समर्थक लाहौर में भिड़े
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क्या था जमान पार्क ऑपरेशन
इससे पहले शनिवार को तोशखाना मामले में गिरफ्तार करने पहुंची पाकिस्तान की पुलिस पूर्व प्रधानमंत्री को अरेस्ट नहीं कर सकी थी। जमान पार्क में सेना और पुलिस को कथित तौर पर इमरान समर्थकों के हिंसक विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद एक ऑपरेशन चलाया गया जिससे पार्क में नो-गो क्षेत्र हटा। तलाशी वारंट होने के बावजूद, अधिकारियों ने आवासीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सके। गृह मंत्री ने कहा कि आवास के बाहरी हिस्से से 65 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से ज्यादातर पंजाब के नहीं हैं और उनकी भूमिका संदिग्ध है।
वहीं पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) डॉ उस्मान अनवर ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान हथियार बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जमान पार्क में कुछ बंकर भी बने हैं जबकि कुछ बुलेट प्रूफ उपकरण भी मिले हैं।
इमरान खान (फाइल फोटो)।
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पीटीआई नेताओं के खिलाफ आतंकवाद का मामला क्यों दर्ज हुआ?
पाकिस्तानी पुलिस ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और एक दर्जन से अधिक पीटीआई नेताओं के खिलाफ आतंकवाद का मामला दर्ज किया। उनके खिलाफ तोड़फोड़, सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने और यहां न्यायिक परिसर के बाहर अशांति पैदा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
दरअसल, इस्लामाबाद न्यायिक परिसर के बाहर शनिवार को उस वक्त झड़पें हुईं, जब इमरान खान तोशखाना मामले की सुनवाई में शामिल होने के लिए लाहौर से इस्लामाबाद पहुंचे थे। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव के दौरान 25 से अधिक सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। इसके बाद अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश जफर इकबाल ने कोर्ट की सुनवाई को 30 मार्च तक के लिए टाल दी।
violent protests by the TLP in Pakistan
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क्या पहले किसी पार्टी को बैन क्या गया है?
यदि इमरान खान की पार्टी पर बैन लगता है, तो पीटीआई दो साल के अंदर प्रतिबंधित होने वाली दूसरी पार्टी बन जाएगी। इससे पहले अप्रैल 2021 में पाकिस्तान की कट्टरपंथी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। यह फैसला देशभर में हुए हिंसक विरोध के बाद आया था, जिसमें चार पुलिसकर्मियो की मौत हो गई थी और 340 घायल हो गए थे। पंजाब सरकार ने संघीय कैबिनेट से अनुमोदित होने के बाद प्रतिबंध के लिए अनुरोध किया था जिसके चलते आतंकवाद विरोधी अधिनियम 1997 के तहत टीएलपी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। तहरीक-ए-लब्बैक को पाकिस्तान सरकार ने 15 अप्रैल, 2021 को प्रतिबंधित कर दिया था।
किसी भी राजनीतिक पार्टी को बैन कैसे किया जा सकता है?
किसी भी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाना पार्टी को भंग करने का पहला कदम होता है। राजनीतिक दल को भंग का उल्लेख पाकिस्तान चुनाव अधिनियम 2017 की धारा 212 और पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 17 (2) में मिलता है। सरकार के घोषणा करने के 15 दिनों के भीतर संबंधित पक्ष के खिलाफ औपचारिक रूप से सर्वोच्च न्यायालय में एक उचित संदर्भ प्रस्तुत की आवश्यकता होती है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
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इसके आधार क्या होते हैं?
सरकार के पास किसी भी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने के लिए उचित आधार की जरूरत होती है। आतंकवाद में लिप्तता और देश की शांति और सुरक्षा के प्रतिकूल कार्य कार्रवाई के लिए दो अहम आधार माने जाते हैं। प्रतिबंध के कारण राजनीतिक दल का दर्जा नहीं रह जाता। बाद में इसके बैंक खातों को जब्त किया जा सकता है, धन एकत्र करने और सभाओं का आयोजन करने या राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करने से रोका जा सकता है।
पाकिस्तान में पहली बार कौन सी पार्टी बैन हुई?
टीएलपी कोई पहली पार्टी नहीं थी जब पाकिस्तान में किसी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को उखाड़ फेंकने की कोशिश के लिए 1954 में पाकिस्तान की कम्युनिस्ट पार्टी को गैरकानूनी घोषित करने वाला पहला राजनीतिक दल था।
पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट
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क्या बैन को अदालत में चुनौती दी जा सकती है?
पार्टी पर प्रतिबंध लगाना पार्टी को भंग करने का पहला कदम होता है। राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का निर्णय ऐसा होता है जिसे अदालत में ले जाया जा सकता है, विशेष रूप से सर्वोच्च न्यायालय में। आतंकवाद कानूनों के तहत प्रतिबंध पर अंतिम मंजूरी कोर्ट की होती है।