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Iran Protest: निर्वासित युवराज की अपील के बाद ईरान में उग्र हुए प्रदर्शन, तेहरान में सरकार ने बंद किया इंटरनेट

Fri, 09 Jan 2026 01:44 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

Iran Protest: ईरान की राजधानी तेहरान में निर्वासित युवराज रज़ा पहलवी की अपील के बाद जोरदार प्रदर्शन हुए। लोगों ने घरों और सड़कों से नारे लगाए, जिसके तुरंत बाद इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। देशभर में फैल रहे प्रदर्शनों में अब तक 39 लोगों की मौत और 2,260 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं।
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ईरान के पूर्व शाह के बेटे रेजा पहलवी - फोटो : एक्स@PahlaviReza
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विस्तार
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मध्य पूर्व के देश ईरान में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। राजधानी तेहरान में गुरुवार रात अचानक विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। यह प्रदर्शन देश के निर्वासित युवराज की अपील के बाद सामने आए, जिसके तुरंत बाद इंटरनेट और फोन सेवाएं भी बंद कर दी गईं।

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गुरुवार रात लोगों ने अपने घरों की छतों से नारे लगाए और कई इलाकों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। यह अपील ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने की थी। चश्मदीदों के मुताबिक, प्रदर्शन शुरू होते ही इंटरनेट सेवा और टेलीफोन लाइनें काट दी गईं, जिससे देश का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट गया।

पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा
यह प्रदर्शन इस बात की पहली बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं कि क्या ईरान की जनता निर्वासित युवराज की अपील से प्रभावित हो सकती है। रज़ा पहलवी के पिता, ईरान के आखिरी शाह, 1979 की इस्लामिक क्रांति से ठीक पहले देश छोड़कर चले गए थे। इन प्रदर्शनों में शाह के समर्थन में भी नारे लगे, जो कभी मौत की सजा तक का कारण बन सकते थे। यह नाराजगी ईरान की बिगड़ती अर्थव्यवस्था से जुड़ी बताई जा रही है।
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देशभर में फैलता आंदोलन
बुधवार से शुरू हुए ये प्रदर्शन राजधानी तक सीमित नहीं रहे। देश के कई शहरों और कस्बों में बाजार और बाज़ार बंद रहे। प्रदर्शनकारियों के समर्थन में व्यापारियों ने कामकाज ठप रखा। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,260 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। बढ़ते विरोध से सरकार और सर्वोच्च नेता खामेनेई पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

नेतृत्व का सवाल
फिलहाल ये प्रदर्शन किसी एक नेता के नेतृत्व में नहीं चल रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में पहले भी विरोध आंदोलनों को एक मजबूत विकल्प के अभाव में दबा दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक 2022 के महसा अमीनी आंदोलन जैसी सख्ती नहीं दिखाई है, लेकिन अगर प्रदर्शन तेज हुए तो कार्रवाई बढ़ सकती है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह आंदोलन सिर्फ गुस्सा बनकर रह जाता है या सत्ता के लिए असली चुनौती बनता है।

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ईरान पर ट्रंप की चेतावनी
ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर तेहरान की नजर टिकी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्या होती है तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। इसी वजह से ईरानी अधिकारी फिलहाल पूरी सख्ती से कार्रवाई करने से बचते दिख रहे हैं। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के बयान को पाखंडी करार दिया है। राजधानी तेहरान सहित कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।

निर्वासित युवराज की अपील
ईरान के निर्वासित युवराज रेजा पहलवी की अपील के बाद देश में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। गुरुवार रात आठ बजे लोगों ने घरों, छतों और सड़कों से नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने तानाशाही और इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ नारेबाजी की। पहलवी ने कहा कि दुनिया ईरान की जनता को देख रही है और दमन का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आगे की रणनीति जनता की प्रतिक्रिया के आधार पर तय करने की बात कही। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और ड्रोन से निगरानी के संकेत भी सामने आए हैं।
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महसा अमीनी के बाद सबसे बड़े विरोध
ईरान में मौजूदा प्रदर्शन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए आंदोलनों के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं। हालांकि ये आंदोलन किसी एक नेता के नेतृत्व में नहीं हैं। कई जगहों पर शाह के समर्थन में नारे लगे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह समर्थन युवराज रज़ा पहलवी के लिए है या 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले के दौर की याद भर है। सरकार अब तक इंटरनेट पूरी तरह बंद करने या भारी सुरक्षा बल तैनात करने से बची है, लेकिन हालात बिगड़ने पर सख्ती बढ़ सकती है।

आर्थिक संकट बना विरोध की जड़
ईरान में बार-बार भड़क रहे प्रदर्शनों की बड़ी वजह गहराता आर्थिक संकट है। जून में इस्राइल के साथ 12 दिन चले युद्ध और कड़े प्रतिबंधों के बाद दिसंबर में ईरानी रियाल गिरकर 14 लाख प्रति डॉलर तक पहुंच गया। महंगाई और बेरोजगारी से परेशान लोग सड़कों पर उतर आए। देशभर के बाजार और दुकानें बंद रहीं। 1979 की क्रांति से पहले जहां रियाल स्थिर था, वहीं अब उसकी गिरावट जनता के गुस्से को और भड़का रही है।


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