फ्रांस के साथ-साथ दुनिया में कहां-कहां भड़के प्रदर्शन।
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भारत में हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के लिए की जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष की तरफ से जबरदस्त प्रदर्शन का आह्वान किया गया। खासकर विपक्षी इंडिया गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने इस मुद्दे के खिलाफ जोर-शोर से प्रदर्शन किए। हालांकि, दिल्ली, मुंबई समेत अलग-अलग शहरों में हुई रैलियां अधिकतर शांतिपूर्ण ही रहीं और हिंसा की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई। इस बीच भारत को प्रदर्शनों के मुद्दे पर नसीहत देने वाले कई पश्चिमी देशों में ही अब आंदोलन भड़क उठे हैं। स्पेन से लेकर फ्रांस और बेल्जियम से लेकर अर्जेंटीना तक अलग-अलग मुद्दों को लेकर जनता सड़कों पर है। इनमें से अधिकतर देशों में तो प्रदर्शन हिंसक हो चुके हैं और आगजनी और लूटपाट की घटनाएं भी देखने को मिली हैं।
आइये जानते हैं कि भारत के अलावा कहां-कहां हालिया दिनों में प्रदर्शन भड़के हैं? विरोध प्रदर्शनों के चलते इन देशों में हालात कैसे हैं? लोगों के सड़कों पर उतरने की वजह क्या है? सरकार लोगों की समस्या को सुलझाने के लिए क्या कर रही है? आइये जानते हैं...
पहले जानें- दुनिया में कहां-कहां हालिया दिनों में प्रदर्शन भड़के हैं?
फ्रांस: पेरिस, मार्सेली, नीस, नांत, बोर्दो, लिमोगेस, ल्योन, लिली, टूलो और स्ट्रॉसबर्ग जैसे शहरों में भारी प्रदर्शन और झड़पें हुई हैं।
इटली: मिलान, बोलोग्ना, ट्यूरिन और रोम में प्रदर्शन दर्ज किए गए। यहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर हमले भी किए हैं।
अल्बेनिया: सरकार की नीतियों के खिलाफ राजधानी तिराना और तटीय शहर दुर्रेस में हिंसक प्रदर्शन भड़के हैं।
बेल्जियम: ब्रसेल्स और लीज में हिंसक प्रदर्शन हुए। पुलिस की भारी तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं।
पुर्तगाल: प्रदर्शनकारियों की तरफ से लिस्बन, पोर्टो और कोइम्ब्रा में रैलियां निकाली गईं।
स्पेन: देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। इनकी गंभीरता को देखते हुए सरकार ने समयपूर्व चुनाव का एलान किया है।
अर्जेंटीना: ब्यूनस आयर्स में विश्वविद्यालय के छात्रों और मजदूर यूनियनों ने राष्ट्रपति हावियर मिलेई की नीतियों को लेकर प्रदर्शन किया है।
तुर्किये: अंकारा में भी बड़ी संख्या में लोग अर्दोआन सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
अमेरिका: अलग-अलग शहरों में कोई राजा नहीं (नो किंग्स) नेटवर्क की तरफ से ट्रंप की नीतियों के विरोध में रैलियां आयोजित किए जा रहे हैं।
अब जानें- जिन देशों में प्रदर्शन जारी, वहां विरोध किस बात का?
फ्रांस: जीवन-यापन की बढ़ती लागत, ईंधन/पेट्रोल की बढ़ती कीमतें, घटती क्रय शक्ति, असमानता और स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खस्ताहाल व्यवस्था और सार्वजनिक खर्च में कटौती के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं।
अल्बेनिया: छात्र आंदोलन के नेतृत्व में प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की जा रही है। इसके पीछे सरकारी भ्रष्टाचार, नौकरियों की कमी, विश्वविद्यालयों की फीस में बढ़ोतरी और तटीय क्षेत्र में लग्जरी रिजॉर्ट निर्माण परियोजना से जुड़ा भूमि विवाद मुख्य कारण हैं।
बेल्जियम: सरकार की ओर से बजट में की गई कटौती, जीवन-यापन के बढ़ते खर्च और उच्च शिक्षा/विश्वविद्यालय पंजीकरण शुल्क में बढ़ोतरी और शिक्षा सुधारों के विरोध में छात्र और युवा सड़कों पर उतरे हैं।
पुर्तगाल: कम वेतन, पेंशन में सुधार की मांग, महंगाई तथा मकानों/किराए की आसमान छूती कीमतों और किफायती आवास (हाउसिंग) की भारी कमी के विरोध में ट्रेड यूनियनों और नागरिकों ने प्रदर्शन किए हैं।
दुनियाभर में प्रदर्शनों का दौर।
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इटली: बढ़ती मुद्रास्फीति (महंगाई), गिरती क्रय शक्ति, कम/स्थिर वेतन, जीवन-यापन के बढ़ते दैनिक खर्चों और युद्धों में इटली की भागीदारी के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन आयोजित किए गए।
स्पेन: मकानों के अत्यधिक किराए और किफायती आवास की कमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। बढ़े किराए के कारण घर से निकाली गई एक बुजुर्ग महिला के निधन के बाद विरोध और भड़क उठा।
अर्जेंटीना: सरकार की ओर से सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा बजट में की गई कटौती के खिलाफ छात्र और मजदूर संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं।
तुर्किये: भीषण महंगाई और अपर्याप्त पेंशन के खिलाफ पेंशनभोगियों व मजदूर संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है।
अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन, युद्ध और घरेलू नीतियों के विरोध में प्रदर्शन भड़के हैं। मध्यावधि चुनावों में मतदान के लिए लामबंदी के तहत भी नो किंग्स नेटवर्क की तरफ से रैलियां आयोजित की गईं, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।
किस-किस देश में किस कदर भड़क चुके हैं प्रदर्शन, हालात कैसे?
1. फ्रांस
प्रदर्शन का पैमाना: देश भर में 5,50,000 से 8,00,000 प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, जिसे दशकों में सबसे अशांत विरोध प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है।
हिंसा और तबाही: पेरिस समेत करीब 10 शहरों में भारी हिंसा, आगजनी और लूटपाट हुई। लिमोगेस का 140 साल से भी ज्यादा पुराना ऐतिहासिक टाउन हॉल जलकर तबाह हो गया। ल्योन में पर्यटन कार्यालय को जला दिया गया, मार्सेली और लिली के सिटी हॉल में तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा पेरिस में आलीशान दुकानों को लूटा गया और ऐतिहासिक स्थल गैलेरीज लाफायेट पर हमला किया गया।
कार्रवाई और नुकसान: 1,200 से ज्यादा लोगों को हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। हिंसक प्रदर्शनकारियों से भिड़ंत में 150 से ज्यादा पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने भीड़ पर काबू पाने के लिए आंसू गैस, वॉटर कैनन और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया।
फ्रांस में छात्र आंदोलन
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2. अल्बेनिया
प्रदर्शन का पैमाना: राजधानी तिराना और दुर्रेस समेत कुछ और शहरों में लगातार पांच दिनों से हिंसक झड़पें जारी हैं।
हिंसा और तबाही: नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर, पेट्रोल बम और मोलोटोव कॉकटेल फेंके। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट, बैंकों और डाकघर की इमारतों में आग लगा दी, जिससे भारी नुकसान होने की आशंका है।
कार्रवाई और नुकसान: हालात बिगड़ने पर पुलिस ने इतिहास में पहली बार प्रदर्शनकारियों पर रबर की गोलियां चलाईं। साथ ही आंसू गैस, वॉटर कैनन और स्टन ग्रेनेड दागे। 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है, और 130 से अधिक पुलिसकर्मी व दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। विशेष बल रिनिया को प्रधानमंत्री कार्यालय की सुरक्षा में तैनात किया गया है।
3. इटली
हिंसा और तबाही: मिलान के प्रसिद्ध चौराहे पियाजा डेल डुओमो और लग्जरी शॉपिंग आर्केड में नकाबपोश उपद्रवियों ने कैफे की मेजों व बैरिकेड्स में आग लगाई, दुकानें लूटीं और पुलिस की गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
कार्रवाई और नुकसान: पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। लगभग 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और कई पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं।
दुनियाभर में प्रदर्शनों का दौर।
- फोटो : अमर उजाला
4. बेल्जियम
हिंसा और तबाही: प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलें फेंकीं और सड़कों पर खड़ी गाड़ियों को पलटकर आग लगा दी। गृह मंत्री ने इसे केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि विशुद्ध संगठित हिंसा करार दिया।
कार्रवाई: पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वॉटर कैनन का प्रयोग किया। कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया।
5. पुर्तगाल
हालात: लिस्बन, पोर्टो और कोइम्ब्रा में दस हजार से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे। किफायती मकानों की कमी के खिलाफ लिस्बन में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टेंट लगा दिए और रास्तों को जाम कर दिया। यहां मुख्य रूप से शांतिपूर्ण मार्च निकाले गए हैं।
6. अन्य देश
अर्जेंटीना: ब्यूनस आयर्स में शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ हजारों छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कुछ गुटों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की। कई लोगों के घायल होने की खबर है।
तुकिये: अंकारा में भीषण महंगाई से परेशान पेंशनभोगियों के प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन इस दौरान एक 60 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ने खुद को गोली मार ली।
सरकारों की तरफ से क्या कदम उठाए गए?
1. फ्रांस
- राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नागरिकों के विरोध प्रदर्शन करने के सांविधानिक अधिकार का बचाव किया और शांति बनाए रखने की अपील की। हालांकि, उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें सजा दी जाएगी।
- हिंसा पर काबू पाने के लिए व्यापक पुलिस कार्रवाई की गई, जिसके तहत हिरासत और गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है। इसके अलावा, प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच पुलिस वॉचडॉग (पुलिस जांच एजेंसी) द्वारा की जा रही है।
2. अल्बेनिया
- प्रधानमंत्री एदी रामा ने छात्रों की इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि उनकी सरकार नागरिकों की सुरक्षा करने, न्याय सुनिश्चित करने और 2030 तक अल्बानिया को यूरोपीय संघ (ईयू) में शामिल कराने के लक्ष्य की दिशा में काम करती रहेगी।
- पुलिस ने उपद्रव को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन, आंसू गैस और सीमित रूप से रबड़ की गोलियां चलाईं। सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। वहीं, अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों में सात पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ जांच शुरू की गई है।
3. पुर्तगाल
पुर्तगाल के संसदीय मामलों के मंत्री कार्लोस अब्रेउ अमोरीम ने साफ कहा कि सरकार सड़कों के दबाव या शोर के आगे नहीं झुकेगी और अपनी नीतियों पर कायम रहेगी।
4. बेल्जियम
गृह मंत्री बर्नार्ड क्विंटिन ने संगठित हिंसा की निंदा की और कहा कि दंगाइयों से निपटने व शांति बहाल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
5. इटली
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने लोकतांत्रिक विरोध का समर्थन किया, लेकिन हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि शहरों को जंग का मैदान बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
6. स्पेन
किफायती मकानों की कमी और बढ़ते किराए पर जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए सरकार ने समय पूर्व चुनाव कराने की घोषणा की है।
7. अर्जेंटीना
अदालतों ने सरकार को 2025 के कानून का पालन करते हुए सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के बजट में बढ़ोतरी करने का आदेश दिया है।