अफगानिस्तान के मसले पर अब अपनी पार्टी के भीतर भी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों के कई सदस्य अफगानिस्तान से फौज वापसी से बने माहौल को संभालने में बाइडन प्रशासन की भूमिका की खुल कर आलोचना कर रहे हैं। एक सांसद ने तो सार्वजनिक बयान में कहा है कि इसे मामले को बहुत बुरी तरह संभाला गया है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि अमेरिका में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के कारण लौटी महामारी की वजह से राष्ट्रपति बाइडन की लोकप्रियता पहले से गिर रही थी। इसी बीच अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो गया। इससे खासकर उन राज्यों के डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता परेशान हैं, जहां कंजरवेटिव मतदाताओं की बहुसंख्या है। ऐसे में राष्ट्रपति की भूमिका से खुद को अलग दिखाना उनकी मजबूरी बन गई है।
मसलन, पेनसिल्वेनिया राज्य से निर्वाचित हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की सदस्य सुजेन वाइल्ड ने कहा है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज को वापस बुलाया जाए, यह तो पुरानी मांग रही है। लेकिन ऐसा लगता है कि ऐसा करने की प्रक्रिया को बहुत बुरी तरह से पूरा किया जा रहा है। वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से बातचीत में वाइल्ड ने कहा कि आगे होने वाली संसदीय बहसों में इस बारे में कई नई सच्चाइयां सामने आएंगी।
उधर, वर्जिनिया राज्य से निर्वाचित अबिगैल स्पैनबर्गर ने उस साझा बयान पर दस्तखत किया है, जिसमें 31 अगस्त तक फौज वापसी पूरी कर लेने के राष्ट्रपति बाइडन के एलान पर फिर से विचार करने की मांग की गई है। स्पैनबर्गर पहले सीआईए के अधिकारी रह चुके हैं। कैलिफॉर्निया राज्य से निवार्चित माइक लेविन और न्यू जर्सी से चुने गए एंडी किम ने भी बाइडन प्रशासन से फौज वापसी की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है।
डेमोक्रेटिक सीनेटर मैगी हसन और मार्क केली ने भी समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। केली के प्रवक्ता ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा- सीनेटर केली कई बार कह चुके हैं कि वे 31 अगस्त की समयसीमा से सहमत नहीं हैं। उनकी राय है कि अमेरिकियों और उनके अफगान सहयोगियों को अफगानिस्तान से सुरक्षित निकालना समयसीमा का पालन करने से अधिक जरूरी है। सीनेटर कॉर्टेज मास्टो ने तो यहां तक कहा है कि उन्होंने बाइडन प्रशासन से उसकी अफगान योजना के बारे में कई बार जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें कभी जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा- ‘अब जो हम देख रहे हैं, वह विनाशकारी है और हमें इसका जवाब चाहिए।'
पर्यवेक्षकों का कहना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद अगले साल होने वाले संसदीय चुनाव में अपनी संभावना को लेकर आशंकित हैं। हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी के चुनाव प्रचार रणनीतिकारों ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि डेमोक्रेटिक पार्टी में कोई घबराहट नहीं है। उनके मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी के पास यह मजबूत तर्क है कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति होने के समय रिपब्लिकन पार्टी ने अफगानिस्तान से सेना वापसी का समर्थन किया था। उनका यह भी कहना है कि आमतौर पर विदेश नीति संबंधी मसले मतदाताओं की प्राथमिकता सूची में बहुत नीचे रहते हैं। इसके अलावा चुनाव में अभी 14 महीनों का वक्त है।