भारत जहां पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों में सताए जा रहे गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता के लिए कानून बना चुका है वहीं पाक में अल्पसंख्यकों के साथ खुलकर भेदभाव किया जा रहा है। यहां मुल्तान बार एसोसिएशन ने बाकायदा एक प्रस्ताव पारित कर गैर मुस्लिम वकीलों को बार काउंसिल के चुनाव में भाग लेने से मना किया है।
पाकिस्तानी मीडिया नया दौर की रिपोर्ट के मुताबिक मुल्तान के जिला बार एसोसिएशन से जुड़े वकीलों ने यह प्रस्ताव वहां होने वाले बार काउंसिल के चुनावों से ठीक पहले पारित किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक बार का चुनाव लड़ने वाले वकीलों को भी इस्लाम में अपनी आस्था को साबित करने के लिए एक हलफनामा पेश करना होगा। वकीलों की इस हरकत पर पाकिस्तान में कोई भी निकाय आवाज नहीं उठा रही है।
बता दें कि इस्लामाबाद पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव के पुराने आरोप हैं जिसके चलते उसकी विश्व बिरादरी में निंदा की गई है। यहां अल्पसंख्यकों के साथ न सिर्फ गलत बर्ताव किया जाता है बल्कि पाकिस्तान प्रशासन ने भी हमेशा अपने शासन को आगे बढ़ाने के लिए धार्मिक, जातीय, सांस्कृतिक और नस्ली असहमति का संरक्षण किया है।
हिंदू, सिख, शियाओं से हिंसा बढ़ी
पाकिस्तान में हिंदू, सिख, अहमदिया और शिया धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ होने वाली हिंसा, सामूहिक हत्याकांडों, अपहरण और दुष्कर्म की घटनाएं भी लगातार बढ़ी हैं। पंजाब प्रांत इस उत्पीड़न का सबसे अधिक शिकार है। पिछले दिनों जबरदस्ती धर्मांतरण के भी कई मामले इसी प्रांत में देखे गए।