श्रीलंका इस समय ऐतिहासिक आर्थिक संकटों का सामना कर रहा है। इस बीच, रविवार को द्वीप राष्ट्र के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीलंका ने आईएमएफ, भारत और चीन के साथ कर्ज पुनर्गठन वार्ता शुरू कर दी है। श्रीलंका इस समय बेहद मुश्किल आर्थिक स्थिति का सामना कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से राहत पाने के लिए चीन के साथ ऋण पुनर्गठन बेहद महत्वपूर्ण है।
रानिल विक्रमसिंघे ने सियाम्बलैंडुवा जिले में एक सभा को संबोधित करते हुए रविवार को कहा कि ऋण पुनर्गठन के लिए बातचीत शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि शनिवार को आईएमएफ, चीन, जापान और भारत के साथ इस बारे में चर्चा हुई है। विक्रमसिंघे ने कहा कि हमारे लिए कर्ज चुकाना मुश्किल होगा, फिर भी हमें अपने कर्ज के बोझ को कम करने के तरीके खोजने होंगे। उन्होंने कहा कि हम ऐसे हालातों का सामना कर रहे हैं जहां हमें ब्याज का भुगतान करने में ही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अगर ऋण पुनर्गठन की बातचीत को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है, तो हम अपनी समस्याओं को हल करने में सक्षम होंगे। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने जोर देते हुए कहा कि इसकी मुझे पूरी उम्मीद है।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने शनिवार को इस मुद्दे पर चीन के वित्त मंत्री से बात की। वहीं दूसरी ओर, श्रीलंका के वित्त मंत्री शेहान सेमासिंघे ने शनिवार को वाशिंगटन में ऋण पुनर्गठन पर भारत के साथ बातचीत शुरू की। इसके अलावा विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, अमेरिका और यूरोपीय संघ के धन का उपयोग दवा और उर्वरक आयात के भुगतान के लिए किया जा रहा है।
गौरतलब है कि अगस्त के आखिर में श्रीलंका ने आईएमएफ के साथ 4 वर्षों में 2.9 बिलियन अमरीकी डालर के बचाव पैकेज के लिए एक कर्मचारी-स्तरीय समझौता किया था। इस समझौते के पूरा होना ऋण पुनर्गठन पर श्रीलंका के लेनदारों के आश्वासन पर टिका है।