राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने विदेश दौरे के तहत स्लोवाकिया पहुंच गई है। जहां उनका राष्ट्रपति महल में औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान विशिष्ट अतिथियों के लिए आतिथ्य, मित्रता और सम्मान के तौर पर ब्रेड और रोटी के उनका स्लोवाक स्वागत किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बुधवार को स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया। राष्ट्रपति मुर्मू बुधवार को अपनी दो-राष्ट्र राजकीय यात्रा के दूसरे चरण में यहां पहुंचीं, वह स्लोवाक गणराज्य की यात्रा करने वाली दूसरी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष बन गईं।
ब्रेड और नमक के साथ राष्ट्रपति का स्लोवाक स्वागत
राष्ट्रपति कार्यालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ब्रातिस्लावा में राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया। लोक परिधान पहने एक जोड़े ने उन्हें रोटी और नमक देकर पारंपरिक स्लोवाक स्वागत किया। राष्ट्रपति का गार्ड ऑफ ऑनर के साथ औपचारिक स्वागत किया गया।' यह प्राचीन परंपरा विभिन्न विशेष अवसरों पर विशिष्ट अतिथियों के लिए आतिथ्य, मित्रता और सम्मान के प्रतीक के रूप में प्रतीकात्मक रूप से निभाई जाती है।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगी राष्ट्रपति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज ब्रातिस्लावा में राष्ट्रपति भवन पहुंचीं। स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ औपचारिक स्वागत किया। यह लगभग तीन दशकों में भारत से स्लोवाकिया की पहली राष्ट्रपति यात्रा है।' स्लोवाकिया में अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति मुर्मू प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड रासी से मुलाकात करेंगी। इस यात्रा के दौरान कई समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे।
भारत और स्लोवाकिया से गहरे संबंध
बता दें कि, पिछली बार किसी भारतीय राष्ट्रपति ने 29 साल पहले स्लोवाकिया का दौरा किया था। राष्ट्रपति मुर्मू मध्य यूरोपीय देश का दौरा करने वाले दूसरे भारतीय राष्ट्रपति बन गई हैं। विदेश मंत्रालय के सचिव पश्चिम तन्मय लाल ने 4 अप्रैल को एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया था कि, 'स्लोवाकिया में विशेष रूप से संस्कृत अध्ययन के साथ गहरे संबंध हैं। महात्मा गांधी की रचनाओं का स्लोवाक में अनुवाद किया गया है, और स्लोवाकिया ने 2022 में यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने के दौरान बहुमूल्य सहायता प्रदान की'।