अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग की करीब एक साल बाद बुधवार को पहली बार आमने-सामने की मुलाकात हुई है। एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की यह मुलाकात सैन फ्रांसिस्को के फिलोली एस्टेट में हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जबकि, अमेरिका और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। विश्व में आर्थिक मंदी छाई हुई है, पश्चिम एशिया और यूरोप में युद्ध छिड़े हैं और ताइवान को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुलाकात के दौरान शी ने बाइडन से कहा कि अमेरिका और चीन को मतभेदों से ऊपर उठने में पूरी तरह सक्षम होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चीन और अमेरिका जैसे बड़े देशों के लिए एक-दूसरे से मुंह मोड़ना कोई विकल्प नहीं है।
हमें सुनिश्चित करना होगा, प्रतिस्पर्धा संघर्ष में न बदले...
वहीं, शी का स्वागत करते हुए बाइडन ने कहा कि वह शी एक-दूसरे को वर्षों से जानते हैं। अमेरिका में आपकी मेजबानी करना एक बड़ा सम्मान और खुशी है। मैं हमारी बातचीत को महत्व देता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि यह सर्वोपरि है कि आप और मैं एक-दूसरे को स्पष्ट रूप से समझें, बिना किसी गलतफहमी या गलतफहमी के। बाइडन ने आगे कहा, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिस्पर्धा संघर्ष में न बदल जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन को अपने लोगों को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने चाहिए, जिसमें जलवायु परिवर्तन, नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के मुद्दे शामिल हैं।
बैठक पर भारत की पैनी नजर
यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के सीईओ मुकेश अघी ने कहा कि अमेरिका और चीन संबंध सामान्य करने के प्रयास कर रहे हैं। भारतीय दृष्टिकोण से इस मुलाकात को देखें, तो दो कमजोर नेता साथ आए हैं। जबकि, भारत के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में एक मजबूत नेता हैं। ऐसे में भारत की इस बैठक पर पैनी नजर है।
अमेरिका-चीन के शीर्ष नेताओं ने ताइवान मुद्दे पर बातचीत की
अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच ताइवान के मुद्दों पर बातचीत हुई। चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा, संयुक्त राज्य अमेरिका को ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन न करने की अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करने के लिए वास्तविक कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं बाइडन ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई है। जनवरी में ताइवान के आगामी मतदान के संबंध में अमेरिका ने अनुरोध किया कि चीन द्वीप की चुनावी प्रक्रिया का सम्मान करे। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा, राष्ट्रपति जिनपिंग और मेरे बीच कई क्षेत्रीय, वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की गई।